कठुआ। मंगलवार रात नौ बजे के लगभग जिला भर को तेज आंधी और तूफान ने अपनी आगोश में ले लिया। कई मील प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी और तूफान ने जिले के बनी इलाके में सबसे अधिक कहर ढाया। प्रशासन नुकसान के आकलन में जुट गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दर्जनों घरों और इमारतों की छतें तूफान ने उड़ा दी। तीन सौ से अधिक फलदार पौधों को भी भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है। तूफान ने बनी में एक स्कूल की इमारत को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। दो इमारतों को आंशिक नुकसान पहुंचने की सूचना है। आंधी का सबसे अधिक असर बनी के बाड़ी, डुग्गन और चलोग के इलाके में देखने को मिला है। हालांकि अन्य इलाके भी अछूते नहीं रहे। दरअसल, पहाड़ी इलाकों के मौसम के अनुकूल अधिकतर घरों की छत टीन की रहती है। ऐसे में कई घरों की छत तूफान में उड़ गई है।
उधर, लोहाई मल्हार इलाके में भी आंधी-तूफान से नुकसान पहुंचने की सूचना है। स्थानीय लोगों के अनुसार लोहाई और मल्हार गांव में छह से अधिक मकानों की छत तूफान की चपेट में आकर उड़ गई। इसके अलावा कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
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प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार ग्यारह घरों को नुकसान पहुंचने की सूचना प्रशासन तक पहुंची है, जिनमें दो घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। नौ को आंशिक नुसान पहुंचा है। प्राइमरी स्कूल चड़ेला की इमारत पूरी तरह से नष्ट हुई है। मिडिल स्कूल सुरजन और गर्ल्स प्राइमरी स्कूल ढग्गर की इमारतों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है।
अजीत सिंह, एसडीएम, बनी
बिजली ढांचे को व्यापक नुकसान
बनी के इलाके में तूफान का कहर बिजली ढांचे पर भी बरपा। शाम साढ़े सात बजे के बाद से तेज हवा चलने के बाद से बिजली विभाग ने बनी इलाके में बिजली को बंद कर दिया। विभाग के जूनियर अभियंता मुजफ्फर नजीर शेख ने बताया कि सुबह होते ही बिजली बहाली के काम शुरू कर दिया गया था। इसके साथ ही रात में तूफान से हुए नुकसान का आकलन भी शुरू हो गया।
उन्होंने बताया कि बनी कसबे और आसपास के इलाकों में सुबह नौ बजे तक बिजली बहाल कर दी गई, जिसके बाद भंडार फीडर के अधीन आने वाले 75 फीसदी गांव शाम छह बजे तक बहाल हुए। उन्हाेंने बताया कि बनी-1 फीडर को शाम तक 50 फीसदी तक बहाल कर दिया गया था। बनी-2 फीडर मात्र दो से तीन फीसदी ही बहाल हो पाया है। अधिकारी ने बताया कि डुग्गन, दुलंगन, ढ़ग्गर, पनियालग, सरथल, कोटी चंडियार इन इलाकों की ओर जाने वाली बिजली लाइनाें में सबसे अधिक नुकसान की सूचना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 130 खंभों टूट चुके हैं, जिसमें पच्चीस लकड़ी के खभें पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। 75 पोल हिलकर टेढे़ हो गए हैं और 57 खंभे जड़ों से उखड़ गए। इसके साथ ही कई किलोमीटर लंबी बिजली लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है। अधिकारियों की मानें तो क्षतिग्रस्त सामान की व्यवस्था होने पर बिजली बहाली के लिए कम से कम दो सप्ताह लग सकते हैं।
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बागवानी को पहुंचा भारी नुकसान
तूफान और ओलावृष्टि ने तोड़ी बागवानों की कमर
मंगलवार देर शाम बनी और डुग्गन के इलाकों में तेज तूफान, बारिश और ओलावृष्टि के चलते बागवानी को भी भारी नुकसान है। प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो पंद्रह से बीस फीसदी तक नुकसान की सूचना है, लेकिन स्थानीय किसानों की मानें को नुकसान का आंकड़ा कहीं अधिक है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नाशपाति, सेब, खुमानी सहित आलू बुखारे को भारी नुकसान पहुंचा है। तीन सौ के लगभग फलदार पौधों को आंधी से नुकसान पहुंचने की सूचना है, जिसमें से 50 फीसदी जड़ों से ही उखड़ चुके हैं। बागवानों की मानें भारी नुकसान की भरपाई हो पाना मुश्किल है। ऐसे में उन्होंने सरकार से मुआवजे की भी मांग की है।