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Jammu Kashmir: दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ नौकरी की ओर बढ़ रहे हैं जम्मू-कश्मीर के छात्र, परख रिपोर्ट का खुलासा

Sat, 12 Jul 2025 07:04 PM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में 13% विद्यार्थी दसवीं के बाद नौकरी शुरू कर देते हैं और केवल 43% स्कूलों में स्किल एजुकेशन की सुविधा उपलब्ध है। शिक्षा में सुधार के लिए करियर काउंसलिंग, स्किल कोर्स और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है।
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Exam - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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शिक्षा में सुधार के तमाम प्रयासों के बावजूद जम्मू-कश्मीर में विद्यार्थियों का जल्द रोजगार की ओर झुकाव चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की आठ जुलाई को जारी परख रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 13 फीसदी विद्यार्थी दसवीं कक्षा पास करने के तुरंत बाद नौकरी शुरू कर देते हैं और आगे की पढ़ाई जारी नहीं रखते। सात फीसदी छात्र ऐसे भी हैं, जो किसी कारणवश हाई स्कूल की पढ़ाई दोबारा करते हैं।

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ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि शिक्षा नीति में जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव की जरूरत है। यह सर्वेक्षण शिक्षा मंत्रालय के समग्र विकास के लिए ज्ञान के प्रदर्शन, मूल्यांकन, समीक्षा और विश्लेषण पर आधारित राष्ट्रीय सर्वेक्षण परख के तहत किया गया था।

पिछले साल दिसंबर में किए गए इस सर्वे में तीसरी, छठी और नौवीं कक्षा के 44,050 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। साथ ही 6,709 शिक्षकों से भी फीडबैक लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 फीसदी छात्र दसवीं पूरी करने के बाद परिवार के कामकाज में जुट जाते हैं। वहीं, केवल 51 फीसदी स्कूल ही छात्रों को करियर काउंसलिंग की सुविधा देते हैं, जिससे आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर मार्गदर्शन की बड़ी कमी सामने आती है। 

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स्कूलों में स्किल एजुकेशन की कमी भी बनी बड़ी चुनौती 
आज के समय में, जब रोजगार के लिए विशेष कौशल की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में स्किल एजुकेशन की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। परख रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के केवल 43 फीसदी स्कूल ही नौंवीं कक्षा और उससे ऊपर के विद्यार्थियों को किसी न किसी स्किल कोर्स की सुविधा प्रदान करते हैं। वहीं, नौंवीं कक्षा में ऐसे कोर्स चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ 34 फीसदी है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्किल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में विविध कोर्स शुरू किए जाने चाहिए, साथ ही जरूरी फंडिंग और अधोसंरचना सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्थानीय रोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए उन्हें जागरूक करना भी जरूरी है। 

सामुदायिक भागीदारी की भूमिका भी जरूरी 
स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संसाधनों को मजबूत करने में समुदाय की भागीदारी भी अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, केवल 42 फीसदी स्कूलों को ग्राम प्रधान या वार्ड सदस्य का सहयोग मिला है।

स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी 34 फीसदी, निजी क्षेत्र की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी गतिविधियां 28 फीसदी और ‘विद्यांजली’ जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञों व स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग 29 फीसदी स्कूलों तक ही सीमित है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन स्कूलों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है, वहां विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। शिक्षा सुधार के लिए स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और निजी क्षेत्र के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना जरूरी है।
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