स्कूलों में स्किल एजुकेशन की कमी भी बनी बड़ी चुनौती
आज के समय में, जब रोजगार के लिए विशेष कौशल की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में स्किल एजुकेशन की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। परख रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के केवल 43 फीसदी स्कूल ही नौंवीं कक्षा और उससे ऊपर के विद्यार्थियों को किसी न किसी स्किल कोर्स की सुविधा प्रदान करते हैं। वहीं, नौंवीं कक्षा में ऐसे कोर्स चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ 34 फीसदी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्किल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में विविध कोर्स शुरू किए जाने चाहिए, साथ ही जरूरी फंडिंग और अधोसंरचना सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्थानीय रोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए उन्हें जागरूक करना भी जरूरी है।
सामुदायिक भागीदारी की भूमिका भी जरूरी
स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संसाधनों को मजबूत करने में समुदाय की भागीदारी भी अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, केवल 42 फीसदी स्कूलों को ग्राम प्रधान या वार्ड सदस्य का सहयोग मिला है।
स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी 34 फीसदी, निजी क्षेत्र की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी गतिविधियां 28 फीसदी और ‘विद्यांजली’ जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञों व स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग 29 फीसदी स्कूलों तक ही सीमित है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन स्कूलों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है, वहां विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। शिक्षा सुधार के लिए स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और निजी क्षेत्र के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना जरूरी है।