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Jammu News: 12वीं परिणाम में सरकारी स्कूलों का दबदबा, तीनों संकाय में 146 विद्यार्थी मेरिट में

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। जम्मू कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने शुक्रवार को 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। निजी स्कूलों के मुकाबले इस बार सरकारी स्कूलों का दबदबा देखने के लिए मिला। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स संकाय की मेरिट सूची में सरकारी स्कूलों के होनहार छाए। इसमें सरकारी स्कूलों के 146 बच्चों ने जगह बनाई।
साइंस संकाय में 161 विद्यार्थियों ने मेरिट सूची में स्थान पाया, जिसमें 79 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों के हैं। आर्ट्स में 53 में से 37 सरकारी स्कूलों से हैं। इसी तरह कॉमर्स संकाय में 63 में से 30 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से रहे। तीनों संकाय में से साइंस को छोड़ दें तो कॉमर्स और आर्ट्स संकाय के टाॅपर भी सरकारी स्कूलों से हैं। साइंस संकाय में गवर्नमेंट श्री रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल परेड की काव्या शर्मा ने 98.6 फीसदी अंक हासिल कर चौथा स्थान पाया। टॉप पांच में सात सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी रहे। कॉमर्स में पहले स्थान पर गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल जैदाबल श्रीनगर की इरतीजा मनजोर हैं। टॉप पांच में 12 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी हैं। आर्ट्स में टॉपर गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल अमीराकदल की महवीन वानी हैं। टॉप पांच में दस विद्यार्थी हैं। यानी सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। स्कूल शिक्षा विभाग इसका श्रेय नीतियों को दे रहा है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल पढ़ाई, योग्य शिक्षक और बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है।
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यूट्यूब से ली ट्यूशन, किसी ने पढ़ाई को दिए सात घंटे, अब लक्ष्य पर फोकस

12वीं परीक्षा परिणाम - होनहारों ने मेहनत के पल किए साझा, परिवार और अध्यापकों के सहयोग व मार्गदर्शन को दिया श्रेय
डॉक्टर बनने के लिए अभी से तैयारी शुरू



साइंस संकाय के टॉपर शाहिद बशीर- नियमित पढ़ाई से सफलता मिली। अच्छे अंक हासिल करने के लिए प्रतिदिन पढ़ाई जरूरी है। डाॅक्टर बनना सपना है। बोर्ड परीक्षा की तरह मेहनत करुंगा। डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करुंगा। अभी नीट की तैयारी कर रहा हूं। परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन व सहयोग से सफलता मिली है।

मेहनत का फल मिला



साइंस संकाय में 495 अंक के साथ सेकेंड मुस्तकीम अफाक - परिणाम से खुश हूं। नियमित पढ़ाई से सफलता मिली। हर विषय को गंभीरता से लिया। इस यात्रा में परिवार, अध्यापक का सहयोग और मार्गदर्शन मिला।

बैंकर बनना है मकसद



कॉमर्स संकाय की मेरिट में चौथे स्थान पर रही मान्या- एसपी हाई सेकेंडरी स्कूल एक्सचेंज रोड जम्मू की छात्रा ने कहा कि स्कूल से तैयारी को पुख्ता रखा। ट्यूशन के बजाय खुद पढ़ाई की। यूट्यूब से काफी कुछ सीखा और सफलता पाई। प्रतिदिन छह से सात घंटे पढ़ाई करती थी। अब बीकॉम करनी है। बैंकर लक्ष्य है।

सीए बनने का सपना



कॉमर्स संकाय की मेरिट में आठवें स्थान पर भूमि - स्कूल में नियमित परीक्षा की तैयारी करवाई जाती थी। पढ़ाई और पर्याप्त मार्गदर्शन से सफलता मिली है। सीयूईटी दी है। बीकॉम की पढ़ाई कर सीए बनना है।

जेईई अब अगला लक्ष्य

साइंस में 97.4 फीसदी अंक पाने वाले शिवम गुप्ता - एसपी हायर सेकेंडरी स्कूल एक्सचेंज रोड के होनहार ने कहा कि नियमित पढ़ाई की थी। उम्मीद तो नहीं थी कि मेरिट सूची में नाम आएगा। अब जेईई मेंस देनी है। उम्मीद है परिणाम अच्छा रहेगा।



घर की परेशानी को बाधा नहीं बनने दिया

कॉमर्स में 96.8 फीसदी के साथ आठवें स्थान पर महक शर्मा - रिहाल बिश्नाह की रहने वाली होनहार सीपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बाड़ी ब्राह्मणा की छात्रा है। कहा - पापा दुकान पर काम करते थे। छह महीने से गंभीर रूप से बीमार हैं। घर की परेशानी को कभी तैयारी में बाधा नहीं बनने दिया। रात दो बजे तक पढ़ाई करती थी। हर विषय को गंभीरता से पढ़ा। सीए बनना चाहती हूं।



चुनौती का मुकाबला किया

साइंस में 389 अंक के साथ डिस्टिंक्शन हासिल करने वाले अरुणदीप - सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल खिलैनी में पढ़ाई की। पहले परीक्षा नवंबर-दिसंबर में होती थी। इस बार मार्च-अप्रैल में हुई। बदलाव चुनौती तो था, लेकिन खुद पर असर पड़ने नहीं दिया।



कंप्यूटर इंजीनियरिंग करना है लक्ष्य

साइंस में 98.6 फीसदी अंक के साथ चौथे स्थान पर काव्या शर्मा - दसवीं सीबीएसई से की। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई गवर्नमेंट एसआरएमएल मॉडल स्कूल परेड से की। पढ़ाई को नियमित रखा। हर विषय को गंभीरता से लिया।फिजिक्स की टीचर रेखा गुप्ता ने विषय को बड़ी सरलता से समझाया। अब कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करनी है। कश्मीर संभाग के बच्चों को तैयारी के लिए डेढ़ साल का समय मिला था। हमने छह से आठ महीने में तैयारी की है।
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घर से सात किमी दूर स्कूल में पढ़ीं, अब साइंस में पाए 97.8 फीसदी अंक
दोमाना। मढ़ की पंचायत गंगों चक के गांव गोल पतन की धांसू शर्मा ने साइंस में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। होनहार घर से सात किलोमीटर दूर हाई सेकेंडरी स्कूल मढ़ में जाती थी। उसने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में बिजली और नेटवर्क की समस्या रहती है, फिर भी दिन-रात पढ़ाई करती थी। बच्ची उन परिस्थितियों को झेल कर यहां तक पहुंची है जहां जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं होते। धांसू शर्मा के जितने अंक आए हैं, उतनी परिवार को उम्मीद नहीं थी, क्योंकि धांसू ऐसे परिवार से आती हैं जहां पेट पालना भी बड़ी बात है। पिता पवन कुमार खेती करते हैं। आशा देवी ने बताया कि बेटी सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, घर के सारे काम भी करती है। स्कूल से लौटने के बाद हाथ बंटाने में मदद करती थी। संवाद
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