एसएमजीएस के इमरजेंसी समेत आईसीयू में बीमार बच्चों की संख्या के मुकाबले सुविधाएं कम हैं। पेडियाट्रिक सेक्शन में निकू (न्यू नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) बी में 33 बेड (इसमें संक्रमण से पीड़ित बच्चे रहते हैं), निकू-ए में 20 बेड (कम वजन और प्रीमेच्योर बच्चे) और निकू-सी में 11 बेड (वेंटिलेटर और इनक्यूबेटर से लैस) हैं।
पिकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में 13 बेड पर एक माह से 18 साल तक के मरीज रखे जाते हैं। अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए केवल आठ वेंटिलेटर हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500-600 बच्चे आते हैं, जिसमें 80-90 बच्चे भर्ती किए जाते हैं। पीडियाट्रिक सेक्शन में नवंबर में 2100 और दिसंबर में 1800 से अधिक बीमार शिशु भर्ती कराए गए।
उधमपुर जिले में नवंबर-दिसंबर में बीमारी से एक भी बच्चे की मौत नहीं हुई लेकिन इस दौरान महिलाओं के गर्भ में ही बच्चों की मौत के 13 मामले सामने आए हैं। जनवरी में यहां अज्ञात बीमारी से रामनगर इलाके में 10 बच्चों की मौत हो गई। किश्तवाड़ में अप्रैल से दिसंबर 2019 तक पांच साल तक के नौ बच्चों और राजोरी में अक्तूबर से दिसंबर तक तीन बच्चों की मौत हुई। उधर, कठुआ जिले में बीते एक साल में एक बच्चे की मौत का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
जम्मू-कश्मीर में शिशु मृत्यु दर 24
जम्मू-कश्मीर ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस 2017) के आंकड़ों के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु में शिशुओं की मृत्यु दर में 24 तक की गिरावट दर्ज की गई है। 5 वर्ष से कम आयु दर का वर्तमान राष्ट्रीय औसत 37 है, जो जम्मू-कश्मीर की तुलना में अधिक है। मृत्यु दर का आंकड़ा एक हजार नवजात (एक साल तक की आयु तक) पर लिया जाता है।