फोटो-डा. विनय विशाल शर्मा
टॉप बॉक्स
जम्मू के तोते हरी मिर्च से ज्यादा फ्रूट्स के दीवाने
मांडा जू के तोतों को भाते हैं सेब और बेर जैसे फल
ब्लैक बियर एक किलो रोटी संग हजम करता है डेढ़ किलो किलो फ्रूट, वेज
दो ग्राम शहद केसाथ ही दो अंडे में होता है दिन का काम
तेंदुए का काम चलता है ढाई किलो मटन-चिकन मिक्स से
प्रवेश कुमारी
जम्मू। जम्मू के मियां मिट्ठू यानी तोते हरी मिर्च से ज्यादा फ्रूट्स के दीवाने हैं। बात मांडा जू के तोतों की है। यहां चार सौ से अधिक तोते हैं, जिनकी पसंद सेब और बेर जैसे फल हैं। संतरे जैसे फल वह पसंद नहीं करते। ऐसा नहीं कि वह मिर्च नहीं खाते, लेकिन मिक्स्ड फ्रूट्स के साथ और बेहद कम। अब जू में रह रहे तीन ब्लैक बियर की बात। ब्लैक बियर रोज एक किलो रोटी संग डेढ़ किलो फ्रूट हजम कर जाता है। मिक्स वेज भी उसकी डाइट का हिस्सा है। दो सौ ग्राम शहद के साथ ही हर दूसरे दिन दो अंडे उसे दुरुस्त बनाए रखते हैं।
अब जरा तेंदुओं पर आएं। मांडा जू में कुल 10 तेंदुए हैं। वयस्क तेंदुए का काम जहां हर रोज ढाई किलो चिकन-मटन मिक्स के साथ चलता है, वहीं बच्चा तेंदुए की जिंदगी एक किलो चिकन-मिक्स से भी चल जाती है। नीलगाय और सांभर के लिए 20 किलो हरे चारे के साथ ही दूसरा कैटल फीड दिया जाता है। बात स्पाटेड/बार्किंग डीयर की करें तो वह 10 किलो हरे चारे के साथ ही एक किलो कैटल फीड पर बसर करता है। खरगोश सौ ग्राम कैटल फीड और सब्जियों पर पल जाते हैं। कबूतर को बाजरा समेत मिक्स फीड मिलता है।
नई जगह पर सात दिन तक नहीं खाते तेंदुए
मांडा जू में कई ऐसे तेंदुए होते हैं, जो परिवार से बिछड़ जाते हैं और उन्हें यहां पहुंचा दिया जाता है। ऐसे में वह सात दिन तक खाने की तरफ देखते तक नहीं। धीरे-धीरे वह यहां वातावरण के अभ्यस्त होते हैं। ऐसा ही नन्हा तेंदुआ यहां 7-8 दिन का पहुंचा था, जो अब दो साल से अधिक का हो गया।
गर्मियाें का खास इंतजाम रहता है। अगर किसी जानवर को गर्मी की वजह से डाइजेशन जैसी दिक्कत आती है, तो उसे रेगुलर फीड देने के बजाय ग्लूकोज भी दिया जाता है।
-डा. विनय विशाल शर्मा, वेटरनरी असिस्टेंट सर्जन, वन्य जीव संरक्षण विभाग