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जम्मू के लोगों से मिले प्यार को कभी नहीं भूल पाऊंगा: गुलजार

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जम्मू। जम्मू के लोगों से मिले प्यार को कभी नहीं भूल पाऊंगा। जम्मू एक ऐसी जगह है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग भाईचारे और सद्भाव के साथ रहते हैं। ये बातें मशहूर लेखक एवं गीतकार गुलजार जम्मू विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली समारोह के समापन अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि उर्दू उनका पहला और आखिरी प्यार है। यह विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त भाषा है, इसलिए इस भाषा का दिन-प्रतिदिन विकास हो रहा है।
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गुलजार ने कहा कि उर्दू की लिपी को बचाना बहुत आवश्यक है। इसलिए यह समय की मांग है कि उर्दू भाषा नई पीढ़ी तक इसकी लिपी के साथ पहुंचे। उन्होंने कहा कि उर्दू और उर्दू के नज्म और शेरों की वजह से ही उनको पहचान मिली है।
समापन अवसर पर लक्षद्वीप के प्रशासक फारूक खान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि वह काफी भाग्यशाली हैं कि उन दिग्गज कवि के साथ मंच साझा कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी कविता सहित पद्य के माध्यम से विभाजन की पीड़ा को व्यक्त किया है। गुलजार हर उस भारतीय का घर का नाम है, जिसने कई उर्दू नजाम लिखी हैं। इस मौके पर ताकी आबदी ने खुशी जाहिर की कि जेयू के समारोह का नाम गुलजार फेस्टिवल रखा। जश्न के अंत में जम्मू विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. मीनाक्षी किल्लम की तरफ से धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
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कई पुस्तकों का किया विमोचन
इस मौके पर गुलजार ने जम्मू क्षेत्र के नवोदित लेखकों की कई पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें एआर मन्हास, फोजाई नसीम मुगल, सामिया चौधरी, पियारे हताश, डॉ. आयूब आदि शामिल हैं। गुलजार ने नए लेखकों की काफी सराहना भी की।
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