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1954 से इंसाफ की बाट जोह रहे 12 लाख परिवार

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पिछले साठ साल से रियासत में पीओके रिफ्यूजियों की समस्याएं बरकरार हैं। साठ साल पूर्व 1954 में जम्मू कश्मीर की कैबिनेट ने पीओके रिफ्यूजियों के अस्थायी पुनर्वास का फैसला किया था।
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अस्थायी शब्द को स्थायी बदलने की उम्मीद अब आगामी चंद दिनों के भीतर होने वाली नेकां-कांग्रेस साझा सरकार की कैबिनेट पर 12 लाख से अधिक पीओके रिफ्यूजियों की नजरें टिकीं हैं।

राज्य की साझा सरकार में पीओके रिफ्यूजियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट का पैकेज पूर्व राजस्व और मौजूदा बागवानी मंत्री रमण भल्ला ने तैयार किया था। अब इस पैकेज संबंधी प्रस्ताव को मौजूदा राजस्व मंत्री एजाज खान ने राज्य कैबिनेट में भेज दिया है।
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'मानवाधिकार उल्लंधन का सबसे बड़ा मामला'

पीओके रिफ्यूजियों की अंतरराष्ट्रीय संस्था के अध्यक्ष राजीव चुनी का कहना है कि छह दशकों से न्याय के लिए लाखों रियासती बाशिंदों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। उन्होंने इसे जम्मू कश्मीर में अब तक का सबसे बड़ा मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू वेस्ट से विधायक प्रो. चमन लाल गुप्ता का कहना है कि केंद्र में एनडीए सरकार के कार्यकाल में पूर्व सांसद वैद विष्णु दत्त और उन्होंने पीओके रिफ्यूजियों के लिए पैकेज मंजूर कराने की शुरूआत की थी। कुछ राशि भी उस समय जारी हुई थी, लेकिन इसके बाद दस साल सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार ने कुछ नहीं किया।

प्रो. गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार को सिर्फ पैकेज का प्रस्ताव मंजूर कर केंद्र को भेजना है, आर्थिक मदद देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तैयार हैं। इसमें साझा सरकार को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।
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पहले हो चुकी हैं तमाम सिफारिशों

नेकां-कांग्रेस की समन्वय समिति की गत 27 अगस्त को हुई बैठक में भी इस पैकेज पर चर्चा हो चुकी है। साझा सरकार की समन्वय समिति में 1947, 1965 और 1971 के स्टेट सब्जेक्ट होल्डर रिफ्यूजियों के लिए पैकेज संबंधी प्रस्ताव पारित कर इसे मंजूरी और आर्थिक मदद के लिए केंद्र सरकार को भेजने पर रजामंदी हो गई है।

बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी से सटे इलाकों के पांच किमी के दायरे में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर प्लाट देने की भी सिफारिश राज्य सरकार से की गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज की अध्यक्षता में हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री तारा चंद, वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर, ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर, हज एंड ओकाफ मंत्री पीरजादा मोहम्मद सईद, पीएचई मंत्री शाम शर्मा और नेकां के जम्मू संभाग के अध्यक्ष देवेंद्र राणा ने शिरकत की थी।
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