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न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषण से खुश नहीं किसान

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कठुआ। केंद्र सरकार की तरफ से खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में किए गए इजाफे से किसानों पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि मामूली इजाफे से किसानों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। जो एमएसपी सरकार ने तय किया है, उससे तो पिछली फसल के नुकसान की भरपाई भी नहीं हो पाएगी और इस बार फसल लगाने का खर्च भी नहीं निकल पाएगा। उन्होंने प्रति क्विंटल उपज पर एक हजार रुपये बढ़ोतरी करने की मांग की है।
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गौरतलब है कि सरकार ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा एमएसपी का एलान किया है। इससे किसानों में खुशी तो है, लेकिन वे कहते हैं किसानों की आर्थिक हालत सुधारने में यह सागर में एक बूंद के समान है। किसानों ने साफ कहा कि है कि कुछ सौ रुपये बढ़ाकर सरकार ने किसानों को गुमराह करने का काम किया है। यह चुनावी एजेंडे के तहत किया गया फैसला है, लेकिन किसान अब गुमराह नहीं होंगे।

मोदी सरकार ने किसानों की आंखों में फिर धूल झोंकने का काम किया
केंद्र की मोदी सरकार ने एक बार फिर से किसानों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। भाजपा ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने का वादा कर केंद्र में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई थी, लेकिन अब वह अपने घोषणापत्र में की गई घोषणा के बिल्कुल उलट चल कर किसानों के साथ धोखा कर रही है। वह इसके बहाने आगामी लोकसभा चुनाव में लाभ उठाना चाहती है, लेकिन अब देश का किसान मोदी सरकार की कथनी और करनी को अच्छी तरह देख-परख चुका है। अब वह और झांसे में नहीं आने वाला है। दो वर्ष पूर्व भी कमेटी की बैठक से पूर्व ही दिल्ली जाकर भारतीय किसान संघ ने किसानों की ओर से ज्ञापन सौंपा था, लेकिन सरकार ने उस समय भी उस पर कोई गौर नहीं किया।
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-शिव देव सिंह, राज्य प्रधान, भारतीय किसान संघ

नहीं होगा कोई लाभ
सरकारी ने पारंपरिक खेती के न्यूनतम समर्थन मूल्य में दो सौ रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है। यह किसानों के साथ मजाक है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों ने सरकार से कम से कम 1000 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया है। किसानों को प्रति क्विंटल फसल उगाने में करीब एक हजार से पंद्रह सौ रुपये का खर्च एक फसल में आता है। इतना खर्च करने के बाद महज 500 रुपये अधिक मिलने से क्या लाभ होगा। कई किसान ऐसे भी हैं, जिनके पास इतनी जमीन ही नहीं है कि वह इस मूल्य पर फसल बेचकर घर खर्च चला सकें। सरकार को उन किसानों के बारे में सोचना चाहिए था।
-घनश्याम शर्मा, किसान, कठुआ

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करे केंद्र
सरकार ने एमएसपी में इजाफा कर अच्छा कदम उठाया है, लेकिन किसानों को तब तक ऐसे एलानों का कोई खास लाभ नहीं मिलेगा, जब तक कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जाता है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अगर इजाफा होता तो किसानों को असल में फायदा होता। यह इजाफा महज दिखावे के लिए ठीक है। फसल की प्रक्योरमेंट पर भी सरकार ध्यान दे। किसानों को निजी मिल मालिकों के रहमोकरम पर नहीं छोड़ना चाहिए।
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-बनारसी दास, संभागीय प्रधान, जम्मू कश्मीर किसान तहरीक
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