जम्मू। एम्स की तर्ज पर रेशमघर में स्थापित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफरोलाजी यूनिट में नौ साल से नई डायलेसिस मशीन नहीं खरीदी गई है। करीब डेढ़ साल पहले परचेज कमेटी ने दस डायलेसिस मशीन को मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक उन्हें खरीदने में जीएमसी प्रशासन और जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने हिम्मत नहीं दिखाई है। जबकि हर साल दो हजार के करीब किडनी के नए मरीज पहुंच रहे हैं।
नेफरोलाजी यूनिट में मौजूदा समय में 20 मशीनें काम कर रही हैं। इन पर रोजाना 20-25 मरीजों का तीन शिफ्ट में डायलेसिस किया जा रहा है, लेकिन किडनी मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जीएमसी से सुपर स्पेशलिटी में वर्ष 2013 में नेफरोलाजी यूनिट को शिफ्ट किया गया था, तब से कोई नई मशीन स्थापित नहीं की गई है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी मिलने के बावजूद सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जम्मू के नेफरोलाजी विभाग में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा को शुरू करने में गति नहीं मिल पाई है। इसके लिए नेफरोलाजी सहित अन्य संबंधित विभागों के ढांचे का विस्तार किया गया है, मगर दो साल से प्रत्यारोपण के लिए उपकरणों की खरीद को लेकर पेंच फंसा हुआ है। प्रत्यारोपण की सुविधा के लिए नेफरोलाजी यूनिट को अपग्रेड करने के साथ ओटी का विस्तार किया गया। पूर्व गठबंधन सरकार की ओर से जुलाई 2018 में किडनी प्रत्यारोपण को शुरू करने की घोषणा की गई थी। इसके लिए जीएमसी फैकल्टी सदस्यों की कमेटी गठित की गई। इसमें ढांचे और अन्य जरूरी संसाधनों व उपकरणों की रिपोर्ट तैयार करके जीएमसी प्रशासन को सितंबर 2018 में सौंपी गई, लेकिन इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
गठबंधन सरकार के जाने के बाद कुछ खास नहीं हो पाया है। यूनिट में 25-40 वर्ष आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलेसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है, लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। इसके लिए उन्हें पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।
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पठानकोट से डायलेसिस को राज्य पहुंच रहे मरीज
जम्मू। सस्ते इलाज की चाह में अन्य राज्यों के मरीज जम्मू के अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफरोलाजी यूनिट में साल दर साल बढ़ती मरीजों की फौज में दूसरे राज्यों के रोगियों की संख्या भी जुड़ रही है। डायलेसिस की बात करें तो पठानकोट जैसे शहर में मरीजों को इस सुविधा के लिए अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ती है, लेकिन यहां निशुल्क इलाज ने अस्पताल में ऐसे रोगियों का आगमन बढ़ाया है। ब्यूरो