डोडा। डोडा जिला और रामबन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले गांव खयेत्तर देसा मलान के विद्यार्थियों और अभिभावकों का गुस्सा शिक्षा विभाग के खिलाफ सातवें आसमान पर पहुंच गया। 35 किलोमीटर का सफर तय कर सैकड़ों लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और यहां चक्का जाम कर गांव में शिक्षकों की कमी दूर करने और हायर सेकेंडरी स्कूल खोलने की मांग की।
मंगलवार की सुबह नौ बजे करीब 350 बच्चे और उनके अभिभावक विजय मोहन के नेतृत्व में 11 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर पहले बिम्ना पहुंचे। वहां से फिर 21 किलोमीटर का सफर वाहनों से तय कर जिला मुख्यालय पहुंचे। सभी हाथों में अध्यापकों की कमी दूर करने और हायर सेकेंडरी स्कूल की मांग को लेकर तख्तियां थीं।
प्रदर्शनकारियों ने डीसी कार्यालय के बाहर चक्का जाम कर दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए विजय मोहन ने कहा कि गांव के स्कूल को 1935 में लोअर हाई स्कूल का दर्जा दिया गया था। यहां दूरदराज गांवों से बच्चे पढ़ने आते हैं।
आज तक इस स्कूल को हायर सेकेंडरी का दर्जा नहीं दिया गया है। इस कारण इलाके के बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है या पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल के 350 बच्चों को पढ़ाने के लिए मौजूदा समय में मात्र तीन अध्यापक हैं।
इनमें भी एक वहां से हटा कर अटैच कर दिया गया है। अब ऐसे में बच्चों के भविष्य का क्या होगा, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने डीसी डोडा भवानी रकवाल से मुलाकात की और मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
डीसी ने लोगों को आश्वासन दिया कि जो पद खाली हैं, वहां जल्द अध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। यह भी कहा कि स्कूल के अपग्रेड होते ही शिक्षकों के नए पद सृजित होंगे और नियुक्तियां की जाएंगी। सभी समस्या का समाधान हो जाएगा। आश्वासन पर प्रदर्शनकारी शांत हुए। जेडईओ भागवा अमर चंद ने बताया कि मौजूदा समय में इस स्कूल में शिक्षकों के पांच पद हैं। इनमें दो खाली हैं।