इक्कीसवीं सदी के भारत में जरा कल्पना कीजिए उस आबादी की जिसके लिए टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसी तमाम चीजें अभी तक सपना ही हैं। लेकिन सच यही है कि जम्मू-कश्मीर में सौ से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां बिजली नहीं पहुंची।
बिजली विभाग के रिकार्ड के अनुसार तीनों खित्तों के 108 गांवों को अभी बिजली नेटवर्क से जोड़ा नहीं जा सका है। यहां एक लाख से ज्यादा की आबादी अब भी बाबा आदम के जमाने की जिंदगी गुजार रही है।
आधिकारिक रिकार्ड के अनुसार जम्मू संभाग में सबसे ज्यादा 62 गांव बिजली से वंचित है। कश्मीर के 27 और लद्दाख के 19 गांवों में बिजली नहीं पहुंची है।
इन जिलों के गावों में आज भी नहीं है बिजली
रियासत के कुल 22 जिलों में से आठ जिलों रियासी, रामबन, किश्तवाड़, लेह, कारगिल, बांडीपोरा, कुपवाड़ा, राजोरी जिलों के दूरदराज के इलाकों में ऐसे गांव मौजूद हैं।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना जिसका नाम अब दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना हो गया है, में भी केवल 25 गांवों में ही उक्त योजना के तहत बिजली पहुंचाने की मंजूरी मिली है।
शेष 83 गांवों को रोशन करने के लिए बिजली विभाग के पास अभी कोई योजना नहीं है। गांवों के अलावा सैकड़ों की संख्या में मोढ़े (चार से दस-बारह घरों तक की बसाहट) भी राज्य में हैं, जहां पर बिजली आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे मोढ़ों का ठीक-ठीक रिकार्ड भी बिजली विभाग के पास है।