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आखिर जान बचाने वाली एंबुलेंस ने किसी का क्या बिगाडा़?

Mon, 22 Aug 2016 07:35 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
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एंबुलेंस - फोटो : File Photo
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घाटी में उपद्रवियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों से उपजे माहौल में एंबुलेंस की आवाजाही मुश्किल हो गई है। जहां तहां पत्थर बरसाए जा रहे हैं।
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लाल बत्ती और सायरन के साथ गुजरती एंबुलेंस तक को पत्थरबाज नहीं छोड़ते। यदि पथराव के बीच से एंबुलेंस निकलने में कामयाब हो जाए तो भीड़ नियंत्रण और कर्फ्यू की पाबंदियों के बीच एंबुलेंस सुरक्षा बलों की गफलत का भी शिकार हो रही हैं। घायलों के शिफ्ट चक्कर करने के चक्कर में एंबुलेंस के कई चालक जख्मी हो चुके हैं।

पिछले 43 दिन से घाटी में जारी हिंसा के दौरान अन्य वाहनों के साथ साथ एंबुलेंस भी तोड़फोड़ का शिकार हुई हैं। श्रीनगर सहित अन्य जिलों में घायलों को लाते ले जाते समय 120 से अधिक एंबुलेंस तोड़फोड़ का शिकार हो चुकी हैं।
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एंबुलेंस चालक ड्यूटी से काट रहे कन्नी

श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक - फोटो : PTI
कई वाहनों से तोड़फोड़ इस कदर हुई है कि उसके चालक और भीतर मौजूद घायल-तीमारदारों को चोटें आई हैं। आपात सेवाओं में शामिल स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस पत्थरबाजों के सिरफिरे पन और कर्फ्यू की पाबंदियों में सुरक्षा बलों की सख्ती का अपवाद नहीं बन पाई हैं।

तीन दिन पूर्व ही वीरवार को सफाकदल इलाके में घायलों को श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल लेकर आ रही एंबुलेंस के चालक पर पेलेट गन की फायरिंग कर दी गई। चालक गुलाम मोहम्मद सोफी के हाथ की हड्डी फ्रेक्चर हो गई। इससे पूर्व भी एंबुलेंस चालकों को मूवमेंट के दौरान जख्मी होना पड़ा है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया रोजाना हिंसक झड़पों में कई लोग घायल हो रहे हैं। इमरजेंसी में एंबुलेंस से ही घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। लेकिन एंबुलेंस को देखकर भी कहीं पथराव कर दिया जाता है तो कहीं सुरक्षा बल पेलेट गन चला देते हैं। अब तो एंबुलेंस चालक भी अपनी ड्यूटी देने से कन्नी काटने लगे हैं।
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