एनडीआरएफ टीम के आफिसर मनोज कुमार पांडे ने बताया कि वह छोटे से बच्चे का दिल नहीं तोड़ना चाहते थे इसलिए उन्होंने तौकीर की मदद के लिए टीम को राजबाग के लिए भेजा।
उन्होंने बताया कि पानी से भरी गलियों से होते हुए एनडीआरएफ की टीम और नाव तौकीर के घर तक पहुंचे। घर के पास पहुंचने पर मुश्ताक अपने बेटे का स्कूल बैग लेने के लिए पानी में उतरकर अपने घर में पहुंचने के बाद सीढ़ियों के सहारे खिड़की के रास्ते से घर के भीतर पहुंचे।
मुश्ताक ने अंदर से अपने बेटे का बैग और घर का जरुरी सामान लेकर बाहर आये। पिता के हाथ में स्कूल बैग देखते ही तौकीर के चेहरे पर खुशी झलक पड़ी।
तौकीर ने जब अपने बैग खोलकर देखा तो उसकी सभी किताबें और कापी पानी से बुरी तरह भीगी हुई थी जिससे तौकीर के चेहरे पर आयी मुस्कान पल भर में ही गायब हो गई।
किताबों के लिए लगा दी जान की बाजी
कश्मीर में आई भीषण आपदा अब भी काफी लोग फंसे हुए हैं। सेना और राहतकर्मी अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। बचावकर्मियों ने कुछ दिनों पहले राजबाग से एक और परिवार को रेस्क्यू किया है। जो काफी दिनों से बाढ़ के पानी फंसा हुआ था।
श्रीनगर में रहने वाले एक परिवार के एक दस साल के बच्चे को अपने स्कूलबैग से इतना प्यार था कि वह आज वापस रेस्क्यू वोट से अपनी किताबे लेने अपने राजबाग स्थित घर पहुंच गया।
दस साल का तौकीर अहमद श्रीनगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल का पांचवी का छात्र है। बाढ़ के समय तौकीर के परिवार को सेना ने हैलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया था।
बैग को वापस लाने के लिए अड़ा तौकरी
तौकीर के पिता मुस्तफा अहमद ने बताया कि तौकरी का पहला प्रयास ये था कि कैसे अपनी किताबों को बचाया जा सके। जब सेना ने उनके परिवार को रेस्क्यू किया था। उस समय तौकीर को अपना स्कूल बैग छत पर ही छोड़ना पड़ा था।
मुस्तफा ने बताया कि, हम लोग रेस्क्यू होकर अपनी बहन के घर रंगरेठ शिफ्ट हो गए। लेकिन तौकीर अपने बैग को वापस लाने के लिए अड़ा हुआ था।
अपने बेटे की जिद से परेशान पिता ने तय किया कि वह उसका बैग लेने वापस घर जाएंगे। राजबाग में अब भी काफी जगहों पर कई फीट तक पानी भरा हुआ है।
तौकीर की मदद के लिए आगे आये एनडीआरएफ के जवानों ने नाव की मदद से दोनों बाप-बेटे को उनके घर तक पहुंचाने में सहायता की।