संस्कृत को तमाम भाषाओं की जननी और संभाषण कला का आधार बताते हुए मानव संसाधन मंत्रालय राज्य में दस अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र खोलने जा रहा है। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली ने इसके लिए पहल कर दी है।
जम्मू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में तीन माह का प्रथमा दीक्षा पाठ्यक्रम सोमवार को शुरू कर दिया गया। खास बात है कि न सिर्फ विद्यार्थियों, बल्कि केंद्र में संस्कृत संभाषण के लिए कोई भी व्यक्ति अपना पंजीकरण करवा सकता है।
संस्थान का लक्ष्य है कि जम्मू-कश्मीर में ज्यादा से ज्यादा लोगों खासकर युवाओं को संस्कृत बोलने लायक बनाया जाए।
जम्मू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली के प्रदेश प्रभारी प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री ने कहा कि संस्कृत भाषा समृद्ध संस्कृति की वाहक है।
संस्कृति के प्रसार से चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। संकाय विभाग अध्यक्ष डा. रमणीका जलाली ने कहा कि संस्कृत में लिखे ग्रंथ विस्तृत हैं।
संस्कृत प्रचार-प्रसार में जुटे डा. केसी शर्मा ने बोलचाल की भाषा में संस्कृत के प्रयोग पर जोर दिया। संस्कृत विभाग की एचओडी डा. सुषमा देवी ने अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र को महत्वपूर्ण प्रयास करार दिया।
पांच चरणों में शिक्षा
स्पोकन संस्कृत पर लक्षित अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र पांच चरणों में शिक्षा प्रदान करेंगे। प्रथम से लेकर पंचम सोपान तक के अवसर दिए जाएंगे। मानव संसाधन मंत्रालय ने प्रति केंद्र तीस प्रशिक्षुओं का अनुमान निर्धारित किया है।