फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कल थे हरे-भरे खेत, आज जमी है रेत

Mon, 06 Oct 2014 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
कल तक जो खेत धान की फसलों से हरेभरे दिखाई दे रहे थे, वहां आज रेत और बजरी दिखाई दे रही है। पिछले महीने के पहले सप्ताह में आई भीषण बाढ़ ने धान की सैकड़ों एकड़ भूमि पर लगी फसल को तबाह कर दिया। अब हाल यह है कि खेती योग्य यह जमीन अब बंजर का डर सता रहा है।
विज्ञापन


बाढ़ ने फसलों को बहाकर खेतों में रेत और बजरी के ढेर लगा दिए हैं। पानी के तेज बहाव के चलते खेतों में नाले बन गए। अब ये खेत दरिया और टापू के शक्ल में दिख रहे हैं। बसंतर और देविका की धारा बदलकर अब खेतों से होकर बह रही है। कई किसानों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनके खेत कहां हैं।

बड़ी बात यह है कि क्षेत्र के कई किसानों ने ठेके पर धान की खेती की थी। उनका लाखों रुपये डूब गया है। ये खेत अब ऊबड़-खाबड़ हो गए हैं। वर्तमान में इन खेतों पर फसल उगाना लगभग नामुमकिन लगता है। खेती करने के लिए पहने जमीन को समतल करना पड़ेगा और रेत को हटाना होगा। यह मुश्किल भरा काम है।
विज्ञापन


किसान सुरजीत चौधरी, कमल चौधरी, सोहन सिंह आदि ने कहा कि रंगूर कैंप, नंगा, बरौटा कैंप, कमौर कैंप समेत दर्जनों गांवों में देविका और बसंतर का सुरक्षा बांध टूटने बाढ़ आ गई थी। इससे घर तो तबाह हुए ही, फसलें भी बह गईं।  किसानों का कहना है कि अब उन्हें अपने परिवार के भविष्य की चिंता सता रही है। सरकार की ओर से ऐसा अभी कुछ नहीं किया गया है जिससे तसल्ली मिले। उन्हें सरकारी मदद का इंतजार है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें