अगले माह के अंतिम सप्ताह से पैरामेडिकल परीक्षाएं शुरू की जा रही हैं। बाढ़ के बाद परीक्षा शेड्यूल को पटरी पर लाने की कवायद की गई है। इन परीक्षाओं में जम्मू संभाग के दस जिलों से करीब दस हजार विद्यार्थी बैठेंगे।
स्टेट मेडिकल काउंसिल के अधीन होने वाली इन परीक्षाओं के बाद विद्यार्थियों को नौकरियों के लिए आवेदन भरने का मौका मिल सकेगा। काउंसिल के उपप्रधान एवं जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता का कहना है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी। इसके लिए खाका तैयार किया जा रहा है।
स्टेट मेडिकल काउंसिल के तहत लैब, डेंटल, एक्सरे आदि विषयों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। पैरा मेडिकल परीक्षाओं में लगातार देरी से हजारों विद्यार्थियों को प्रभावित होना पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों से पैरा मेडिकल के विभिन्न विषयों में दो साल में पूरा होने वाले कोर्स को पांच साल लग रहे थे।
पिछले साल कश्मीर में बाढ़ के कई महीनों बाद परीक्षा नतीजे घोषित किए गए। इससे विद्यार्थी अन्य कोर्सों और नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पाए। इस व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शेड्यूल के मुताबिक परीक्षाएं करवाने की तैयारी की जा रही है।
ये परीक्षाएं जीएमसी सहित अन्य परीक्षा केंद्रों में आयोजित होंगी। पिछले साल फरवरी में परीक्षाओं के बाद जून में करीब दस फीसदी नतीजे घोषित किए गए थे, जिससे विद्यार्थियों ने कई दिन तक विरोध किया था। इसके बाद दोबारा अगस्त में सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में हजारों विद्यार्थी बैठे, लेकिन सितंबर में कश्मीर में बाढ़ से परीक्षाएं और प्रैक्टीकल प्रभावित हुए। मौसम के बिगड़े मिजाज का जम्मू पर भी असर दिखा और नवंबर के मध्य जाकर दोबारा परीक्षाएं मुकम्मल हो पाईं और जनवरी 2015 में नतीजे घोषित किए गए।
विद्यार्थी राजेश गुप्ता का कहना है कि पैरामेडिकल परीक्षाओं को समय पर आयोजित करवाने से परीक्षार्थियों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। इससे वे अन्य कोर्स भी समय पर कर पाते हैं और उनकी समय की बरबादी नहीं होती है। देरी से परीक्षाओं के कारण कोर्स लंबे खींचते रहते हैं।