इंडिया वाटर वीक के तहत पीएचई के कम्युनिकेशन एंड कैपसिटी डेवलपमेंट यूनिट की ओर से वाटर मैनेजमेंट पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में यूनिट के सदस्यों ने लोगों को पानी की जांच करने के तरीके भी बताए। कार्यक्रम में एडीडीसी नरेंद्र सिंह बाली बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।
वहीं केंद्रीय भू-जल आयोग के क्षेत्रीय निदेशक आके भगत, सीसीडीयू के कार्यकारी निदेशक नरेंद्र भटियाल साथ की विभागीय अधिकारियों ने भी उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम में जल संरक्षण के लिए हर आदमी की ओर से प्रयास करने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने पानी की कमी पर चिंता जताई और कहा कि वर्तमान में व्यक्ति को उसकी जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
जल संरक्षण पर पर्याप्त जोर न देने के चलते न सिर्फ हमारे मुल्क में वरन दुनिया के कई देेशों मेें अभी से पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है।
गर्मी के मौसम में जहां पानी की कमी होती थी, आज सर्दी के मौसम में भी पानी की कमी होने लगी है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी को दूर करने के लिए मानव जाति को पहल करनी होगी। बारिश के पानी का अधिक इस्तेमाल करने के साथ साथ वन क्षेत्रों को बढ़ाना होगा, ताकि समय पर पानी के लिए लोगों का भटकना न पड़े।
उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र को बढ़ाने से जहां पानी की उपलब्धता होगा वहीं बाढ़ और कंडी क्षेत्र को बढ़ने से भी रोक सकते हैं।
इस मौके पर एडीडीसी ने कहा कि पानी की कम होती उपलब्धता के कारण लेागों को परेशानी होती है और विभाग पर इसका ठीकरा फोड़ा जाता है।
ऐसे में लोगों को समझना होगा कि विभाग उतना ही पानी उपलब्ध करवा सकता है जितना विभाग के पास है। उन्होंने सरपंचों-पंचों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कहा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अपने अपने क्षेत्र की समस्याएं भी बताई और उनके हल के लिए विशेषज्ञों से राय ली।