रामगढ़ के सीमावर्ती गांवों में बाढ़ से उपजे हालात का जायजा लेने पहुंचे डिवीजनल कमिश्नर शांत मनु ने पीड़ितों को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है। डिवकॉम ने बाढ़ में तबाह हुई कृषि भूमि, फसलों और सुरक्षा बांध में हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने किसानों को ढांढस बंधाया कि उन्हें राज्य सरकार और प्रशासन की ओर नुकसान की भरपाई के पूरे प्रयास किए जाएंगे।
क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ में बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों के घर ढह गए हैं। फसलें बह गई हैं। तारापुर, कौलपुर, रतनपुर, बरौटा कैंप, कमौर, कमौर कैंप, रंगूर कैंप, नंगा आदि गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शनिवार को डिवकॉम ने इन गांवों में जाकर पीड़ितों का हाल जाना।
इन गांवों की हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि बसंतर और देविका नदी में आई बाढ़ में बह गई है। ग्रामीणों ने डिवकॉम को बताया कि उनकी खेती योग्य भूमि अब बंजर हो गई है। उपजाऊ परत पूरी तरह बह गई है। अब उनके सामने खाने के लाले पड़ जाएंगे। घरों में जो कुछ बचा था वह भी बाढ़ की भेंट में चढ़ गया है। डिवकॉम ने पांच गांवों नंगा, बरौटा, रंगूर कैंप, कमौर, कमौर कैंप (इन गांवों में सबसे अधिक तबाही हुई है) में हुए नुकसान का आकलन शीघ्र करने के आदेश दिए हैं।
इस पर डिवकॉम ने कहा कि पीड़ितों की समस्याएं जल्द सुलझाई जाएंगी। मुआवजे का इंतजाम शीघ्र किया जाएगा। अधिकारी ने निर्माणाधीन सुरक्षा बांध का भी जायजा लिया। यह बांध बाढ़ में टूट गया था। उन्होंने जिला प्रशासन को दस दिन में इसका प्रोजेक्ट भेजने के आदेश दिए हैं। इसके बाद उन्होंने कमौर क्षेत्र में डिच लाइन का दौरा किया। डिवकॉम के साथ डीसी सांबा मुबारक सिंह, विधायक सुरजीत सिंह सलाथिया भी मौजूद रहे। बाढ़ पीड़ित अपना हाल बयां करते समय भावुक हो गए।
उन्होंने बताया कि मवेशियों के लिए चारा तो पूरी तरह खत्म हो गया है। हम लोगों को तो राशन सामग्री मुहैया हो जाएगी, लेकिन मवेशियों का क्या होगा। इस मौके पर विधायक ने डिवकॉम से गुजारिश की कि प्रभावित गांवों में छह महीने तक मुफ्त राशन दिया जाए।
मुफ्त चिकित्सा शिविर लगाए जाएं। कृषि योग्य भूमि को समतल बनाया जाए। किसानों का कर्ज माफ किया जाए। मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराया जाए।