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घरों को लौटने लगे ग्रामीण

Sun, 26 Oct 2014 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अरनियां
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बीस दिनों तक शरणार्थी शिविरों में शरण लिए सीमावर्ती किसान डरे-सहमे ही सही, लेकिन अब घरों की ओर लौटने लगे हैं। पककर तैयार खड़ी फसल ने उन्हें लौटने को मजबूर कर दिया। ये लोग भले ही अपने घरों में आ गए हैं, लेकिन इन्हें हर पल पाकिस्तानी गोलाबारी का खौफ है।
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भैयादूज पर शनिवार को सुबह नौ बजे से लोगों ने शिविरों से गांवों की ओर रुख कर दिया। देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। अरनिया कसबे में ही तकरीबन 65 प्रतिशत लोग घरों में लौट आए हैं।

दरअसल, वर्तमान में धान की मोटी और बासमती फसल पककर तैयार है। कुछ और दिनों में अगर इसकी कटाई नहीं की गई तो इसके दाने झड़ जाएंगे। पहले से ही बाढ़ और पाकिस्तानी गोलाबारी की मार खाए किसान किसी भी हाल में बचीखुची फसल को बर्बाद नहीं होने देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने दिवाली के बाद घरों को लौटना ही उचित समझा।
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बताया जाता है कि पाकिस्तान के चारबा सेक्टर के गांव चारबा, बदोयाल, ठीकरे आली आदि के किसान धान की मोटी फसल की कटाई में जुट गए हैं। कुछ किसानों को फसल की सिंचाई करते भी देखा गया है। भारतीय क्षेत्र के किसान गुरिंद्र सिंह, प्रेमचंद, गारचंद, त्रिलोकी नाथ, सूरज आदि का कहना है कि धान की मोटी फसल पककर तैयार है। शरबती धान को जल्द नहीं काटा गया तो यह बर्बाद हो जाएगा

किसानों का कहना है कि उन्हें परिवार को पालना है तो जान जोखिम में डालनी ही पड़ेगी। फसल नहीं काटेंगे तो साल भर खाएंगे क्या। किसानों का कहना है कि खेतीबाड़ी ही उनके परिवार का आर्थिक जरिया है। फसल बर्बाद हो जाएगी तो कई मुसीबतें आएंगी।
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