अनलॉक के बाद जम्मू शहर से अगल-अलग जिलों के लिए चलने वाली बसों में भारी कमी आई है। इसके दो बड़े कारण हैं, एक डीजल के दामों में रोज बढ़ोतरी और दूसरा यात्री न मिलना। लॉकडाउन से पहले रोजाना 2500 से अधिक बसें चलती थीं। अब इनमें सिर्फ 30 प्रतिशत यानी 700 बसें ही सड़क पर हैं, जबकि 70 बसें ऑपरेटरों ने खड़ी कर दी हैं।
जम्मू-कठुआ बस रूट के अध्यक्ष कुलदीप सिंह कहते हैं कठुआ रूट पर 300 बसें चलती थीं। वर्तमान में 50 से 60 बसें ही चल रही हैं। पहले हर पांच मिनट में एक बस रवाना की जाती थी, अब 20 मिनट में बस चल रही है, फिर भी यात्री नहीं हैं। अमरनाथ यात्रा नहीं हो रही है, अंतरराज्यीय बसें बंद हैं।
यात्री की कमी है, तो संभव है आगे भी बसें खड़ी रहेंगी। लॉकडाउन के कारण मार्च से जून तक बसें खड़ी रहीं। सरकार इस समय का पैसेंजर और टोकन टैक्स मांग रही है। बैंक की किस्तें जमा नहीं होने पर नोटिस मिल रहे हैं। वहीं ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विजय कुमार कहते हैं कि अनलॉक के बाद सिर्फ 30 प्रतिशत बसें ही सड़क पर हैं, 70 प्रतिशत खड़ी हैं। लोग सार्वजनिक परिवहन में सफर करने से बच रहे हैं।
सरकार ने 19 प्रतिशत यात्री किराया बढ़ाया, लेकिन आज डीजल 90 रुपये पहुंच गया है, गाड़ी की लागत पूरी नहीं हो पा रही है, बचना तो दूर की बात है। इन हालात में सरकार राहत देने की बजाय खड़ी बसों पर रोड और पैसेंजर टैक्स लगा रही है। जम्मू से उधमपुर, डोडा, रामबन, रियासी, राजोरी, पुंछ, किश्तवाड़ सहित अन्य जिला रूट्स पर बसों की संख्या 10 से 20 प्रतिशत रह गई है।
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