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जम्मू-कश्मीर में अनलॉक: यात्रियों की कमी से 70 फीसदी बसें खड़ी, 30 फीसदी ही चल रहीं

Tue, 29 Jun 2021 08:58 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

कठुआ के लिए पहले हर पांच मिनट में मिलती थी बस, अब 20 मिनट बाद भी नहीं मिलती।
 
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जेकेएसआरटीसी की बसें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अनलॉक के बाद जम्मू शहर से अगल-अलग जिलों के लिए चलने वाली बसों में भारी कमी आई है। इसके दो बड़े कारण हैं, एक डीजल के दामों में रोज बढ़ोतरी और दूसरा यात्री न मिलना। लॉकडाउन से पहले रोजाना 2500 से अधिक बसें चलती थीं। अब इनमें सिर्फ 30 प्रतिशत यानी 700 बसें ही सड़क पर हैं, जबकि 70 बसें ऑपरेटरों ने खड़ी कर दी हैं।

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जम्मू-कठुआ बस रूट के अध्यक्ष कुलदीप सिंह कहते हैं कठुआ रूट पर 300 बसें चलती थीं। वर्तमान में 50 से 60 बसें ही चल रही हैं। पहले हर पांच मिनट में एक बस रवाना की जाती थी, अब 20 मिनट में बस चल रही है, फिर भी यात्री नहीं हैं। अमरनाथ यात्रा नहीं हो रही है, अंतरराज्यीय बसें बंद हैं।

यात्री की कमी है, तो संभव है आगे भी बसें खड़ी रहेंगी। लॉकडाउन के कारण मार्च से जून तक बसें खड़ी रहीं। सरकार इस समय का पैसेंजर और टोकन टैक्स मांग रही है। बैंक की किस्तें जमा नहीं होने पर नोटिस मिल रहे हैं। वहीं ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विजय कुमार कहते हैं कि अनलॉक के बाद सिर्फ 30 प्रतिशत बसें ही सड़क पर हैं, 70 प्रतिशत खड़ी हैं। लोग सार्वजनिक परिवहन में सफर करने से बच रहे हैं।
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सरकार ने 19 प्रतिशत यात्री किराया बढ़ाया, लेकिन आज डीजल 90 रुपये पहुंच गया है, गाड़ी की लागत पूरी नहीं हो पा रही है, बचना तो दूर की बात है। इन हालात में सरकार राहत देने की बजाय खड़ी बसों पर रोड और पैसेंजर टैक्स लगा रही है। जम्मू से उधमपुर, डोडा, रामबन, रियासी, राजोरी, पुंछ, किश्तवाड़ सहित अन्य जिला रूट्स पर बसों की संख्या 10 से 20 प्रतिशत रह गई है।

यह भी पढ़ें- श्री अमरनाथ यात्रा: कश्मीर के ऐतिहासिक मंदिरों से पहुंचेगी अमरनाथ छड़ी मुबारक, 22 अगस्त को होंगे बाबा बर्फानी के दर्शन

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पांच प्रतिशत मेटाडोर ही सड़कों पर
शहर में चलने वाली मेटाडोर की हालात भी खस्ता है। केवल पांच प्रतिशत मेटाडोर ही सड़कों पर चल रही हैं। जम्मू शहर में छोटे रूट जैसे परेड से राजपुरा सहित अन्य पर तो मेटाडोर चल ही नहीं रही। मिनी बस यूनियन के अध्यक्ष विजय कुमार चिब ने कहा कि जम्मू और आसपास में चार हजार मिनी बसें हैं, अनलॉक के बाद पांच प्रतिशत गाड़ियां ही सड़कों पर है।

हर रूट पर पांच से सात गाड़ियां हैं। मिनी बस का एवरेज प्रति लीटर दो से तीन किमी ही होता है, आज डीजल की कीमते प्रतिदिन बढ़ रही हैं। अधिकांश मेटाडोर खड़ी हैं, क्योंकि जम्मू में शैक्षणिक संस्थान बंद हैं, अमरनाथ यात्रा नहीं है, जिससे यात्रियों की संख्या काफी कम है।

व्यवसाय बदल रहे हैं ट्रांसपोर्टर
कोरोना के कारण बने हालात ने ट्रांसपोर्टरों को अपना व्यवसाय बदलने को मजबूर किया है। मालिक से लेकर ड्राइवर-कंडक्टर ने काम बदल लिया है। गाड़ी खड़ी रहने से मालिक ड्राइवर और कंडेक्टर को आधा वेतन ही दे पा रहे थे, जिससे परिवार को खर्च चलाना मुश्किल होता गया है। ऐसे में कई लोगों ने ट्रांसपोर्ट को छोड़ कर दूसरे काम शुरू किए हैं।
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