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Udhampur News: जिले के कोकून उत्पादन में लगातार बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी

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उधमपुर। विभागीय कार्य​क्रम में भाग लेतीं महिला कीटपालक: संवाद
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-सम्मानजनक आजीविका कमाने के साथ ही क्षेत्र में कर रहीं शानदार प्रदर्शन
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिला उधमपुर में रेशम कीट पालन में महिलाओं की भागीदारी ने नारी सशक्तीकरण का शानदार उदाहरण पेश किया है। जिले में बीते एक दशक में कोकून उत्पादन के काम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ कर 50 प्रतिशत तक हो गई है।
महिलाओं की संख्या बढ़ने के कारण ही जिले में कोकून के उत्पादन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है और वर्तमान में जिला उधमपुर बढि़या किस्म की बाईवोल्टाइन कोकून के उत्पादन में प्रदेश के 10 जिलों में सबसे ऊपर अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया है। सालाना कारोबार भी बीते पांच वर्षों में चार करोड़ से बढ़कर सात करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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विभागीय सहयोग व समर्थन से लगातार आगे आ रहीं महिलाएं, कमा रहीं सम्मानजनक आजीविका
सेरिकल्चर विभाग के सहयोग और सुविधाएं मिलने पर महिलाएं लगातार कीट पालन के साथ जुड़ती जा रही है। शुरुआत में कीट पालन का कार्य केवल पुरुष ही किया करते थे, लेकिन फिर सेरीकल्चर विभाग द्वारा जागरूक किए जाने पर महिलाओं ने भी इसमें हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। वर्तमान समय में कीट पालन का ज्यादातर कार्य महिलाओं पर ही निर्भर हो चुका है। शहतूत की टहनियां तोड़ कर घर पहुंचाने से लेकर कीटों की देखरेख व रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी घरों में महिलाएं ही कर रही हैं। यही नहीं, मंडी में कोकून बेचने के लिए भी सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पहुंच रही हैं।
रामनगर की रीता देवी को किया गया सम्मानित
सेरीकल्चर विभाग के रिकार्ड के अनुसार हर वर्ष लगभग छह हजार कीट पालक कीट पालन कर करोड़ों रुपये की कोकून का उत्पादन करते हैं। करीब डेढ़ दशक पहले जहां जिला में मात्र 1000 महिलाएं कोकून बेचने के लिए मंडी पहुंच रही थी। वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर तीन हजार के आसपास पहुंच गई है। इस कड़ी में बीते साल आयोजित कोकून मंडी में रामनगर की रीता देवी पत्नी सुभाष चंद्र को 1295 रुपये प्रति किलो ए ग्रेड कोकून बेचकर 94,664 रुपये की आमदन प्राप्त हुई। उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनने पर किसान मेले में सम्मानित भी किया गया।

घर पर रहकर आय बढ़ाने का बढि़या साधन
यह घर पर रहते हुए ही सम्मानजनक तरीके से अपनी आय को बढ़ाने का बढि़या साधन है। पहले इस काम को घर के पुरुष ही करते थे। लेकिन अब विभाग के लगातार सहयोग व प्रशासन से महिलाएं भी आगे आ रही हैं। इस काम से मैं भी अब हर सीजन में 50 से 60 हजार रुपये तक कमा रही हूं।
-सुनीता देवी, कथील गंजू, रामनगर


ग्रामीण महिलाओं के लिए अच्छा घरेलीू स्वरोजगार

ग्रामीण महिलाओं के लिए यह एक बहुत ही अच्छा घरेलू स्वरोजगार है। सरकारी मदद और जानकारी से इसे ग्रामीण महिलाएं बिना किसी परेशानी के कर सकती हैं। इसमें अधिक मेहनत की भी जरूरत नहीं हैं। मैं स्वयं इस काम से हर सीजन में अच्छी आमदन कमा कर अपने परिवार के पालन पोषण में सहयोग कर रही हूं।
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-शीला देवी, रामनगर

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कोट...

कोकून उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सम्मानजनक आजीविका कमाने के साथ ही उन्हें घरेलू रोजगार भी मिल रहा है। वे आत्मनिर्भर हो रहीं हैं। विभाग अधिक से अधिक महिला किसानों को इसमें जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
-सुषमा गौतम, विभागीय अधिकारी
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