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Udhampur News: अक्षरज्ञान को भुलाया, स्वरों को अपनाया

Mon, 02 Jun 2025 12:14 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
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प्रसिद्ध डोगरी लोक गायिका कालो देवी।
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अनपढ़ होने के बावजूद कालो देवी ने लोकगायकी में बनाई अलग पहचान
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जिला उधमपुर के ग्रामीण इलाकों में मानी जातीं हैं डुग्गर लोकगायकी का आधार स्तंभ
संवाद न्यूज एजेंसी

उधमपुर। जिले की प्रख्यात लोकगायिका कालो देवी का ठेठ डोगरी गीतों के प्रचार-प्रसार में खास योगदान है। सार्वजनिक मंचों पर लोकगीत गायन और साथ में नृत्य करने की कला ने इन्हें इस क्षेत्र में खास मुकाम प्रदान किया है। वह खुद गीत बनाकर स्वयं ही कंपोज करके गाती भी हैं। सोशल मीडिया पर उनके गीतों की भरमार है लेकिन निरक्षर होने के कारण उनके गीत और प्रस्तुतियों का कोई खास विधिवत रिकॉर्ड नहीं मिलता।
साल 1964 में बिलावर के एक गांव में जन्मीं कालो देवी अब 61 साल की हो चुकी हैं। वह मात्र 14 साल की उम्र से सार्वजनिक मंचों पर अपनी टोली के साथ गाने के साथ नृत्य भी करतीं हैं। कालो देवी उस समय से सार्वजनिक कार्यक्रम करतीं रहीं हैं जब ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को घर की चहारदीवारी से बाहर अकेले जाने तक की इजाजत नहीं दी जाती थी।
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करीब 47 साल की अवधि में उन्होंने विभिन्न सामाजिक विषयों पर हजारों की संख्या में गाने बनाए और गाए हैं। वह शादी, विवाह से लेकर डोगरी संस्कृति के रीति-रिवाजों और रिश्तों की हंसी ठिठोली इत्यादि विषयों पर भी गाने गाने गाती हैं।
कालो देवी की गायकी और नृत्य के बिना अधूरा माना जाता था कार्यक्रम
ग्रामीण इलाकों में 1980 के दशक में डोगरी लोकगायन में कालो देवी की तूती बोलती थी। इनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि उस जमाने में ग्रामीण इलाकों में कालो देवी की गायकी और नृत्य के बिना कोई भी कार्यक्रम अधूरा माना जाता था। बाद में पद्मश्री रुमालू राम समेत कई अन्य लोक कलाकारों ने भी काफी लोकप्रियता हासिल की लेकिन जिला उधमपुर में ठेठ डोगरी लोक गायकी को जिंदा रखने और इसे बढ़ावा देने में हमेशा आधार स्तंभ रहीं कालो देवी को उनका हक नहीं मिल सका जबकि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उपलब्ध इनके गानों को ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़े चाव के साथ सुना जाता है।

पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल में भी मचा चुकी हैं धूम

पूरी तरह से निरक्षर कालो देवी को किसी भी विषय पर तत्काल गीत बनना और उसे शानदार तरीके से प्रस्तुत करना जानती है। यही खासियत उनकी लोकप्रियता का राज है। सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा दूरदर्शन और सरकारी कार्यक्रमों में भी इन्हें प्रस्तुति के लिए खास तौर पर आमंत्रित किया जाता है। वह उधमपुर के अलावा जम्मू, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत कई पड़ोसी राज्यों में अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इनकी इस कला के चाहने वालों की संख्या लाखों में है।

परिवार के सहयोग से बढ़ पाईं आगे

कालो देवी का कहना है कि 17 साल की आयु में शादी होने के बाद ससुराल वालों ने भी उनकी गायकी और लोककला पर कभी एतराज नहीं जताया। शादी से पहले और बाद भी उन्हें हमेशा परिवार का सहयोग मिलता रहा। इसी कारण वह डोगरी लोकगायकी की सेवा में प्रयासरत रह सकीं।
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डुग्गर लोकगायकी को उच्चतम शिखर तक पहुंचाना है सपना

कालो देवी का कहना है कि अनपढ़ होने के कारण वे चाहकर भी डुग्गर लोकगायकी को उच्च शिखर तक नहीं ले सकीं लेकिन नई पीढ़ी के डोगरी लोकगायकी के प्रति लगाव और इसके प्रचार-प्रसार से वह काफी खुश हैं। उनका सभी के लिए यही संदेश है कि शिक्षा जीवन और समाज की बेहतरी के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए बच्चों को स्कूल अवश्य भेजें और उन्हें अपने भीतर छिपी कला या प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर भी दिलाएं।
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