किश्तवाड़। प्रसिद्ध श्री सरथल देवी यात्रा शनिवार को स्थानीय गौरी शंकर मंदिर सरकूट से सरथल के लिए रवाना हो गई। इस दौरान कोविड एसओपी का पालन करते हुए कम ही लोग शामिल हुए। दो घंटे के सफर के बाद यात्रा सरथल पहुंच गई है, जहां उसका जोरदार स्वागत किया गया।
शनिवार सुबह मंदिर परिसर में हवन का आयोजन किया गया, जिसकी दो बजे पूर्णाहुति डाली गई। इसके बाद माता के जयकारे लगाते माता की थाली और माता का खटोला लेकर यात्रा प्रस्थान कर गई। हालांकि यात्रा गत वर्ष की तरह ही कोविड के चलते सीमित की गई है। मंदिर परिसर में छबील लगाई गई और प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान डीसी अशोक कुमार शर्मा ने भी गौरी शंकर मंदिर में माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा में अधिकतर ट्रस्ट के सदस्य ही शामिल हुए।
ट्रस्ट के उपाध्यक्ष संजीव कुमार परिहार के नेतृत्व में यात्रा दो घंटे के सफर के बाद सरथल गांव पहुंची जहां अगराल व सरथल निवासियों ने जोरदार स्वागत किया। गौरतलब है कि माता के मंदिर में कई दिनों से विश्व शांति के लिए शतचंडी महायज्ञ जारी था, जिसका रविवार को समापन होगा।
पहली बार बिना ढोल नगाड़ों के रवाना हुई यात्रा
पहली बार बिना ढोल नगाड़ों के यात्रा किश्तवाड़ से सरथल के लिए रवाना हुई। कोरोना के चलते प्राचीन प्रथा को ग्रहण लगा है। पहले यात्रा में हजारों लोग शामिल होते थे। विद्यार्थी और केंद्रीय रिर्जव पुलिस बल के दल शोभायात्रा में विशेष रूप से हिस्सा लेते थे। दो साल से यात्रा का रंग फीका हो गया है, जिससे जिलेवासी काफी निराश हैं।