उधमपुर। शहर के सभी 21 वार्डों में क्षतिग्रस्त गलियों का सर्वे होगा। इसके लिए टीम का गठन होगा और डीपीआर बनाई जाएगी।
सीवरेज और जलशक्ति के अलावा अन्य विभागों की ओर से पाइप लाइन बिछाने के लिए तोड़ी गई गलियों की मरम्मत न होने से इनकी दशा दयनीय बनी हुई है। इससे लोग परेशान हैं। नगर परिषद व प्रशासन की ओर से विशेष टीम का गठन किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शहर के सभी वार्डों में कितनी गलियाें व सड़कों की दशा दयनीय है और किस विभाग ने मरम्मत का कार्य अभी तक नहीं किया है। वार्डों के सर्वे के लिए बनाई जाने वाली विशेष टीम में नगर परिषद के अधिकारियों के अलावा प्रशासन के अधिकारी भी शामिल होंगे। वहीं जल्द ही यह टीम शहर के सभी वार्डों का निरीक्षण कर अपनी एक रिपोर्ट तैयार कर नगर परिषद को सौंपेगी। इसके बाद जिन विभागों ने नगर परिषद की ओर से पाइप लाइन व अन्य निर्माण कार्य के दौरान गलियों की खोदाई के बाद मरम्मत नहीं की है, उनके अधिकारियों को एक पत्र लिखकर उसकी मरम्मत करवाने के लिए डीपीआर तैयार करवाएगी।
21 वार्डों में कम से कम 50 से ज्यादा गलियां हैं क्षतिग्रस्त
हालांकि शहर के सभी 21 वार्डों में स्थित गलियाें व सड़कों में ज्यादातर सीवरेज विभाग की ओर से सीवरेज की पाइप लाइन बिछाने के दौरान खोदाई की गई। इसके बाद विभाग ने पाइप लाइन तो बिछा दी लेकिन उस गली की मरम्मत का कार्य नहीं करवाया जा सका। इसके चलते पिछले दो साल से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई गलियां आज तक नहीं हो सकीं पक्की
इस टीम की ओर से यह भी देखा जाएगा कि शहर के सभी वार्डों में कितनी गलियां हैं, जो आज तक नहीं बन पाई हैं। वैसे शहर के वार्ड नंबर एक, छह, सात, आठ, 10, 18, 19, 20 और 21 में अभी भी कई गलियों का निर्माण नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि शहर के बीचोंबीच स्थित वार्ड नंबर नौ में दो महीने पहले जलशक्ति विभाग ने पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए गली में लगी टाइलों को उखाड़ा गया था लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी आज तक मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया है। इसके चलते लोग काफी परेशान हैं।
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नगर परिषद व प्रशासन की ओर से एक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है। इस टीम की ओर से शहर के 21 वार्डों का निरीक्षण कर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर इन वार्डों में कौन से विभाग ने गलियों की खोदाई करने के बाद उनकी मरम्मत का कार्य नहीं किया है। उसकी एक रिपोर्ट एक महीने के भीतर तैयार करने के बाद निर्माण करने के लिए डीपीआर बनाई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि वार्डों में कितनी गलियां क्षतिग्रस्त हैं और कितनी गलियां आज तक नहीं बन पाई हैं।
-राजेंद्र डींगरा, सीईओ नगर परिषद