उधमपुर। जिले में लंपी के मामलों में बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी है और अब लंपी से मरने वाले पशुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी है। जिले में अभी तक कुल 18 मवेशियों की लंपी से मौत हो चुकी है। इसके साथ 900 से अधिक सक्रिय मामले मौजूद है। पशु पालन विभाग के लिए अब ग्रामीण पशुओं के उपचार के लिए दवाएं उपलब्ध करवाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
करीब एक महीने से जिले में लंपी के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। पहले जहां हर रोज दस से 15 मामले सामने आ रहे थे तो अब हर रोज 50 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। पशु पालन विभाग के लिए स्थिति को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। अगस्त महीने में जिले में लंपी के मामले सामने आने लगे थे और सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद पशु पालन विभाग की टीमें भी दिन रात पशुओं के उपचार के साथ वैक्सीन लगाने के काम में जुटी हुई है। पशु पालन विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार जिले में अभी तक लंपी के कुल मामलों की संख्या 1846 हो गई है। इनमें से 848 पशु लंपी को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि बाकी के पशुओं को आइसोलेशन पर रखा हुआ है। इन पशुओं की पशु पालन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और ग्रामीणों की उपचार में मदद कर रही है। जिले के विभिन्न हिस्सों में 18 पशुओं की मौत भी हो चुकी है और मौत के बढ़ते मामलों से पशु पालन विभाग और ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ती जा ही है। पशुओं की ज्यादातर मौते मजालता, कैंबल डंगा, घोरडी, खून, सुद्धमहादेव में हो रही है।
7600 से अधिक पशुओं को लगाई जा चुकी है वैक्सीन
जिले में करीब दो सप्ताह से स्वस्थ पशुओं को लंपी से बचाने के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें ग्रामीण इलाकों में पहुंच कर वैक्सीन लगाने का काम कर रही है। दो सप्ताह के अंदर करीब 7600 पशुओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। विभाग को पूरे जिले में दो लाख से अधिक पशुओं को वैक्सीन लगानी है।
ग्रामीणों के लिए दवा का खर्च उठाना हो रहा मुश्किल
लंपी का शिकार पशु के उपचार के लिए ग्रामीणों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। पशु पालन विभाग के अनुसार लंपी का शिकार होने पर पशु के उपचार के लिए हर रोज करीब 400 रुपये का खर्च आ रहा है। सात दिन तक पशु को लगातार दवाई के साथ इंजेक्शन लगाने पड़ रहे हैं। जो दवाएं पशु पालन विभाग के पास मौजूद हैं। उनको ग्रामीणों को आधी कीमत पर उपलब्ध करवाई जा रही है। लेकिन कुछ दवाएं बाजार से पूरी कीमत पर खरीदनी पड़ रही है। एक पशु के उपचार के लिए ग्रामीणों को तीन हजार रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।
18 पशुओं के सैंपल की रिपोर्ट आई पॉजिटिव
जब पशुओं में लंपी के लक्षण नजर आने लगे थे तो विभाग की तरफ से 18 पशुओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल की लैब में भेजे गए थे और कुछ दिन पहले ही इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अब यह पुष्टी हो चुकी है कि जो भी मामले सामने आ रहे हैं उन पशुओं में लंपी वायरस ही है।
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पशु पालन विभाग की तरफ से पशुओं के उपचार में ग्रामीणों की हर संभव मदद की जा रही है। लेकिन अब हालात यह बन गए हैं कि विभाग के पास भी दवाएं खत्म होने लगी हैं। विभाग की दिन रात पशुओं के उपचार के साथ वैक्सीन लगाने में जुटी हुई हैं। अभी तक 306 जागरूकता शिविर लगाकर ग्रामीणों का जागरूक भी किया जा चुका है।
डॉ. राकेश गुप्ता, मुख्य पशुपालन अधिकारी, उधमपुर