बिजली होने के बावजूद लोग वाटर टैंक मंगवाकर कर रहे गुजारा, पिछले चार दिनों से कई इलाकों में सुचारु नहीं हुई बिजली-पानी की सप्लाई
उधमपुर। भारी बारिश के कारण लगातार चार दिनों से कई इलाके बिजली-पानी की सुविधा से महरूम हैं। बिजली होने के बावजूद लोग वाटर टैंक मंगवाकर गुजारा कर रहे हैं। कई लोग होटलों में रात गुजारने को मजबूर हैं तो कोई रिश्तेदार के घर।
कुछ इलाकों में बिजली तो बहाल की गई है लेकिन जलापूर्ति 96 घंटों से पूरी तरह से ठप है। इस कारण आम आदमी की रोजमर्रा की दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। 26 अगस्त की आपदा ने जिले में बिजली-पानी के ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था जिससे जिले में बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई थी। कम नुकसान वाले इलाकों को समय रहते दुरुस्त कर दिया है।
उधमपुर शहर के ओमाड़ा, त्रिकुटा नगर और डाक बंगला में चौथे दिन भी बिजली बहाल नहीं हो पाई है। ग्रामीण इलाकों में मनवाल और बसंतगढ़ में भी बिजली ढांचे को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से मजालता, मनवाल, रामनगर व बसंतगढ़ के कई इलाकों में भी बिजली सप्लाई पूर्ण रूप से बहाल नहीं हो पाई है।
देश दुनिया से कटा हुआ कर रहे महसूस : लगभग चार दिनों से बिजली के बिना समय व्यतीत कर रहे लोगों की मानें तो उनका कहना है कि ऐसा लगता है वो जैसे देश दुनिया से पूरी तरह से ही अलग हो चुके हैं। न मोबाइल चार्ज हुए हैं और न ही टेलीविजन चलते हैं। इससे देश समाज में क्या हो रहा है उससे पूरी तरह से बेखबर हैं।
बिजली कटौती रसोई पर पड़ी भारी : ओमाड़ा निवासी संतोषी देवी, रानो देवी और रेणू देवी ने बताया कि सबसे अधिक मार रसोई पर पड़ी है। न सही ढंग से खाना बन पा रहा है और न ही आटा, सब्जी या अन्य खाद्य सामग्री सुरक्षित टिक पा रही है। कुछ परिवार सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना घर पर तैयार कर रहे हैं। मगर रात को होटल या रेस्टोंरेंट में खाने को मजबूर हैं।
पानी को लेकर प्राकृतिक जलस्रोतों पर भी बड़ा संघर्ष : वहीं कई परिवार रात को गर्मी और मच्छर की मार से बचने के लिए होटल में रहने को मजबूर हो गए हैं। रात को आराम से होटल में ही खाना खाने और सोने के बाद अगल दिन सुबह वहीं से नहा धोकर काम पर निकल जा रहे हैं। हालांकि कुछ लोग सुबह-सुबह उठकर बॉवली या अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों पर नहाने चले जाते हैं और साथ में बाल्टी व बर्तन भी ले जाते हैं ताकि वापसी पर घर के लिए पीने का पानी भी ला सकें। लेकिन मौजूदा समय में बॉवलियों पर भी इतनी अधिक भीड़ हो रही है कि लोगों को पानी के लिए भी कड़ी मशकत करनी पड़ती है। जिन इलाके में बिजली बहाल हो गई है वो तो टैंकर मंगवा कर घर के टैंक बरवा ले रहे हैं लेकिन जिन इलाकों में बिजली नहीं वो पानी का टैंकर भी नहीं मंगवा सकते क्योंकि बिजली के बिना मोटर कैसे चलाएंगे।
शहर के लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल
शहर में लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में बिजली बहाल कर दी गई है। डाकबंगला, ओमाड़ा से लगते इलाकों में शुक्रवार शाम तक बिजली बहाल होने की संभावना है जबकि चिनैनी, रामनगर, मनवाल, मजालता, सतैनी, जागनू के कई इलाकों में काफी नुकसान पहुंचा है।
- सुनील दत्त पंडोह, कार्यकारी
अभियंता, पीडीडी
सलमेय फिल्ट्रेशन प्लांट शुरू, सिटी के कई इलाकों में सुचारु हो जाएगी वाटर सप्लाई
सलमेय फिल्ट्रेशन प्लांट को सुचारु कर दिया गया है। जिससे शहर के अधिकतर इलाकों में शुक्रवार शाम या शनिवार सुबह से वॉटर सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। जबकि वन विभाग कार्यालय के पास ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है जिससे दुरुस्त करने में शनिवार को भी दिन लग सकता है। ग्रामीण इलाकों में भी व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है लेकिन घोरडी बरमीन इलाके में ग्रेविटी लाइन पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैै।
- संदीप गुप्ता, कार्यकारी अभियंता, पीएचई