- पीएमजीएसवाई विभाग को जमकर कोसा, जवानों की सलामती की करते रहे दुआ
- खाई से लेकर अस्पताल और हेलिकॉटर तक पहुंचाने में पूरे गांव ने की मदद
सौरभ सागर
उधमपुर। बसंतगढ़ के कदवा हादसे में जवानों का दर्द देकर वहां के लोग भी तड़प उठे और बचाव कार्य में यथासंभव प्रयास कर मानवता की मिसाल दी। स्थानीय लोगों ने हादसे के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) विभाग को जिम्मेदार ठहराया जो पिछले छह सालों से सड़क का निर्माण कार्य परा नहीं कर पाया।
कदवा में हुए दर्दनाक हादसे का मंजर कितना भयावह था, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि बचाव के वक्त सबसे पहले मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों के मुंह से पीएमजीएसवाई विभाग के लिए सिर्फ बद्दुआं निकल रही थी, जो सोशल मीडिया पर वीडियो के माध्यम से लगातार वायरल हो रही हैं। ऊपर वाले को याद करते हुए हर कोई जवानों की सलामती की दुआ कर रहा था। खाई में जगह-जगह अधमरी हालत में तड़पते सीआरपीएफ के जवान पड़े हुए थे।
उनके दर्द को उस समय उन लोगों ने करीब से महसूस किया तो वो भी तड़प उठे। बुजुर्ग हो या जवान यहां तक महिलाएं भी खाई में कूद पड़ीं और जवानों की मदद करने में जुट गए। वाहन में फंसे जवानों को बाहर निकाला गया। कोई घर से पानी लेकर दौड़ा तो कोई चारपाई और उन्हीं चारपाई के माध्यम से गंभीर रूप से घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
धर्म पूछा न जात, कदम-कदम पर दिया साथ
राहत कार्य में जुटे स्थानीय लोगों ने धर्म पूछा न जात, बस हर किसी का यही प्रयास था कि अधिक से अधिक जवानों को बचाया सके और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर समय पर उपचार उपलब्ध करावा सकें। घटनास्थल से लेकर पीएचसी बसंतगढ़ और फिर वहां से हेलिकाप्टर के लैंडिंग प्वाइंट तक जवानों की मदद में शायद ही गांव का कोई ऐसा व्यक्ति हो जो अपने-अपने स्तर पर कोई न कोई प्रयास न कर रहा हो।
हथियारों की सुरक्षा में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
सीआरपीएफ की 137वीं व 187वीं बटालियन के जवान कदवा से आगे जन सुरक्षा से जुड़ी अपनी आपरेशन ड्यूटी को अंजाम देकर बसंतगढ़ लौट रहे थे। उस समय उनके पास अपने हथियार भी मौजूद थे। हादसे के वक्त कई हथियार भी खाई में बिखरे नजर आए परंतु स्थानीय लोगों ने जवानों की रक्षा करने के साथ हथियारों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाई ताकि कोई भी हथियार किसी असामाजिक तत्व के हाथ न लग सके। हालांकि पुलिस व सेना ने मौके पर पहुंचकर हथियारों को अपनी हिफाजत में ले लिया।
गौरतलब है कि बसंतगढ़ आतंकी मूवमेंट को लेकर कई बार सुर्खियों में रह चुका है क्योंकि सीमा वर्ती इलाकों से घुसपैठ के बाद जिला कठुआ से डोडा-किश्तवाड़ पहुंचने के लिए आतंकी बसंतगढ़ के घने जंगलों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में दर्दनाक हादसे के दौरान अगर स्थानीय लोग मानवता की मिसाल न देते तो विरोधी तत्व इसका फायदा उठा सकते थे।
जवानों को विभाग की लापरवाही का शिकार होना पड़ा
स्थानीय लोगों का आरोप था कि 2018 में पीएमजीएसवाई ने कदवा से लोधरा रोड का निर्माण शुरू किया था। जिसे आजतक पूरा नहीं किया गया है। उबड़-खाबड़ रोड और बरसात के कारण जगह-जगह फिसलन, सड़क धंसना, मलबा गिरने की वजह से आए दिन हादसे की आशंका बनी रहती है। जिसको लेकर कई बार विभाग को भी सूचित किया जा चुका है परंतु बावजूद इसके कोई प्रयास नहीं किए गए और विभाग की लापरवाही का शिकार जवानों को होना पड़ा।