चिनैनी कस्बे में शिव महापुराण कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। संसारी मनुष्य आपस में प्रेमपूर्वक रहे तो संसार सुंदर हो जाएगा। लेकिन, हमारा अहंकार हमें प्रेम करने नहीं देता है। यदि हम अंहकारी हैं तो हम प्रेम करने का दिखावा ही कर सकते हैं, लेकिन वास्तव में प्रेम नहीं कर पाएंगे। यह ज्ञान संत सुभाष शास्त्री ने मंगलवार को चिनैनी कस्बे में आयोजित शिव महापुराण कथा में संगत को दिया।
उन्होंने संगत को समझाया कि प्रेम शब्द को हर कोई अपने-अपने तरीके से समझता है। उन्होंने बताया कि काम बंधन है और प्रेम प्रसन्नता देने वाला है। काम-वासना जहां बंधन में बांधती है, वहीं प्रेम प्रसन्नता प्रदान करता है। प्रेम एक पवित्र व शुद्ध वस्तु है, जबकि काम-वासना एक अशुद्ध चीज है। प्रेम एक पुष्प है और काम एक कांटा है।
प्रेम को ज्यादा विस्तारपूर्वक समझना कुछ कठिन है। फिर भी मां का प्रेम औलाद के लिए, माली का बाग के लिए, गुरु का शिष्य के लिए और भक्त का प्रेम भगवान के लिए है। इसलिए सदा सबसे प्रेम करें।