- लापरवाही से वाहन चलाने और दूसरों की जान को खतरे में डालने का था आरोप
अदालत से .. का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने एक आपराधिक मामले में अपना अपराध स्वीकार करने के बाद अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर आरोपी को रिहा करने का फैसला सुनाया।
थाना उधमपुर में दर्ज मामले में अशरफ अली को गिरफ्तार किया गया था। उन पर लापरवाही से वाहन चलाने और दूसरे की जान को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप थे। अशरफ अली ने अपना अपराध स्वीकार किया और गलती न दोहराने का वादा करते हुए नरमी बरतने का अनुरोध किया। न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया कि अभियुक्त को पता था कि वह स्वीकारोक्ति करने के लिए बाध्य नहीं है और स्वीकारोक्ति से दोष सिद्धि हो सकती है। न्यायालय ने सत्यापित किया कि स्वीकारोक्ति स्वेच्छा से बिना किसी दबाव, धमकी या अनुचित प्रभाव के की गई थी।
परिस्थितियों, अभियुक्त के स्वीकारोक्ति, उसके वकील द्वारा प्रस्तुत दलीलों और किसी भी आपराधिक रिकॉर्ड की अनुपस्थिति को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने अभियुक्त को अच्छे आचरण की परिवीक्षा का लाभ देने का निर्णय लिया। अदालत ने अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 की धारा 3 को प्रस्तुत किया, जो अदालत को कुछ अपराधियों को चेतावनी के बाद रिहा करने की अनुमति देता है।
विशेष रूप से आईपीसी की विशिष्ट धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों के लिए या अधिकतम दो वर्ष के कारावास, जुर्माने या दोनों से यदि कोई पूर्व दोष सिद्ध नहीं होता है। अदालत ने स्वीकारोक्ति के आवेदन को स्वीकार कर लिया और आरोपी को उचित चेतावनी देने के बाद अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया। आदेश में यह भी निर्देश दिया गया कि जब्त किए गए सभी दस्तावेज या वाहन सत्यापन के बाद उसके असली मालिक को सौंप दिए जाएं।