संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर/चिनैनी। मोह के कारण हम सदा दुःखी और चिंतित रहते हैं। यह जानते हुए भी कि जिसने जन्म लिया है, उसे मृत्यु की गोद में जाना ही है। यह बातें कथावाचक सुभाष शास्त्री ने चिनैनी स्थित गीता भवन में शिवमहापुराण कथा का श्री गणेश करते हुए कहा।
सुभाष शास्त्री ने कहा कि आप दुनिया में रहिए, प्यार भी करिए, परंतु आसक्ति मत रखिए। आसक्ति, मोह ही दुखों की जड़ हैं। सांसारिक वस्तुओं से जितना भी मोह रखेंगे, वह आपको दुख ही देंगे। केवल धर्म ही आपका साथ देता है। नीति में कहा है कि जीवन का मित्र आहार है। रूप का मित्र यौवन है। यौवन का मित्र पुरुषार्थ है। पुरुषार्थ का मित्र उपकार है। रोगी का मित्र वैध और मरने वाले का मित्र धर्म है। इसे सभी को जानना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक जगदीश पंडित और अन्य ने कथावाचक से आशीर्वाद लिया। संवाद