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प्रभु की प्राप्ति के लिए मन में श्रद्धा होना अति आवश्यक : कथा वाचक

Wed, 24 Apr 2024 04:06 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से गीता भवन में श्री हरि कथा का आगाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। श्री हनुमान जयंती के पावन पर्व पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में गीता भवन चिनैनी उधमपुर में श्री हरि कथा का आगाज हुआ। पहले प्रथम दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी दीक्षा भारती ने प्रभु श्री हरि की महिमा का गुणगान किया। साथ ही बताया कि प्रभु की प्राप्ति के लिए मन में श्रद्धा का होना आवश्यक है।
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उन्होंने बताया कि श्री हरि की पावन कथा रूपी गंगा में जिस समय व्यक्ति गोता लगाता है तो अपने कर्म संस्कारों की कालिमा से स्वयं को पवित्र बना लेता है। प्रभु श्री हरि को प्राप्त करने के लिए मानव में श्रद्धा का होना अति आवश्यक है। रामचरितमानस में कहा गया है राम, अतर्कय, बुद्धि मन वाणी अर्थात ईश्वर बुद्धिमान और वाणी का विषय नहीं है। ईश्वर की भक्ति तो श्रद्धा प्रेम विश्वास का विषय है। यदि मानव में धर्म को लेकर के दायरे बंध चुके हैं। सर्वप्रथम आवश्यकता है एक सद्गुरु की शरणागत होकर उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करने की जिसके माध्यम से हम उस एक निराकार शक्ति, ज्योति स्वरूप उस परमात्मा का साक्षात्कार कर पाए। इस धरा पर प्रभु श्री राम के आने का उद्देश्य प्रत्येक जीवात्मा के अंतर्गत में बैठे उसे निराकार परमात्मा से मानव को अवगत करवाना है। प्रभु का जन्म ही नहीं, उनका पूरा जीवन चरित्र मानव के उत्थान के लिए है। दशरथ और दशानन दोनों के जीवन में एक समानता है। दोनों का जीवन रूपी रथ दश इंद्रियों से निर्मित है पर दशरथ ने जीवन रुपी रथ को प्रभु को सौंप दिया, पर दशानन रावण ने विकारों के अधीन किया। आज युवाओं के मन में उठने वाली कामनाओं, वासनाओं के कारण हमारे समाज में नारी शोषण के जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इस मौके पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासानंद, पंडित मदन आदि मौजूद रहे।
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