- बट्टल बालियां की सीमा देवी अब प्रति माह कमा रहीं 25 से 30 हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। शहर के नजदीक बट्टल बालियां कस्बे की सीमा देवी ने शादी के दस साल बाद खुद का स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भरता का नया सफर आरंभ किया है।
दो बच्चों की मां सीमा के पति साहिल कुमार भी काम में कभी-कभी उनका हाथ बंटाते हैं। दोनों उधमपुर के छोटे से कस्बे बट्टल बालियां में रहते हैं। साहिल एक टूरिस्ट टैक्सी चलाता है। उसके पिता एक छोटा सा किराना स्टोर चलाते हैं। शादी के दस साल बाद सीमा ने कुछ बड़ा करने का सोचा। उसका सपना था कि वह खुद पैसे कमाए और अपने परिवार को मजबूत बनाए।
एक शाम सीमा ने साहिल से अपने परिवार के किराना स्टोर को बड़ा बनाने के अपने विचार के बारे में बात की। साहिल को उसकी योजना पसंद आई और उसने उसकी मदद करने का वादा किया। उसके सहयोग से, सीमा अपने सपने को साकार करने के लिए तैयार हो गई।
शुरुआत में सीमा को जम्मू-कश्मीर ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से जेएंडके बैंक की बट्टल बल्लियां शाखा से तीन लाख का ऋण मिला। वह एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में छह दिवसीय प्रशिक्षण में भी शामिल हुई जहां उसने व्यवसाय चलाना, धन का प्रबंधन करना और ग्राहकों से बात करना सीखा। इस प्रशिक्षण ने उसे आवश्यक आत्मविश्वास दिया।
ऋण और नए कौशल के साथ, सीमा ने किराना स्टोर को और बेहतर बनाया। उसने अपने कस्बे के लोगों की ज़रूरत की और भी चीज़ें उसमें शामिल कीं। साहिल ने उसकी मदद की और दोनों ने मिलकर कड़ी मेहनत की। अब सीमा हर महीने 25 से 30,000 कमाती हैं। वह कहती हैं कि उसकी सफलता में एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से सीखी गई शिक्षाओं और उसकी कड़ी मेहनत का नतीजा है।
सीमा अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। वह अपने आत्मनिर्भरता के इस सफर को नये मुकाम तक पहुंचाने के लिए एक सिलाई की दुकान और सौंदर्य प्रसाधन बेचकर अपनी दुकान को और भी बड़ा करना चाहती है। यह जेकेआरईजीपी के उस लक्ष्य के अनुरूप है जिसके तहत वह अपने जैसे छोटे व्यवसायों को सहयोग देना चाहती है। सीमा की कहानी दर्शाती है कि एक सपने, कड़ी मेहनत और थोड़ी सी मदद से कोई भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। वह अपने परिवार और अपने शहर के लिए एक प्रेरणा हैं।