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Udhampur News: न गेट न चहारदीवारी, जर्जर कमरों से दांव पर बच्चों की सुरक्षा

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उधमपुर। सरकारी मिडिल स्कूल बरेड़ियां की खस्ताहाल किचन : संवाद
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- गांव की मुख्य सड़क और तालाब के किनारे मौजूद है 35 साल पुराना मिडिल स्कूल बरेड़ियां
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। सरकारी मिडिल स्कूल बरेड़ियां में चहारदीवारी का अभाव और इमारत की जर्जर हालत से विद्यार्थियों की सुरक्षा दांव पर है। हादसे की आशंका को देखते हुए स्कूल की चहारदीवारी बनाने की मांग ग्रामीण बीते कई सालों से कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
इसके अलावा स्कूल की जर्जर हो चुकी इमारत भी गंभीर हादसों का डर पैदा कर रही है। यह स्कूल गांव की मुख्य सड़क और तालाब के साथ मौजूद है। लगभग 35 साल पुराने इस स्कूल में 65 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए छह शिक्षक तैनात हैं। स्कूल में पांच क्लासरूम हैं और गैर शिक्षण कार्यों के लिए दो कमरे हैं। इन कमरों की हालत काफी ज्यादा खराब है।
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कुछ कमरों की पिछली दीवारों में तो पेड़ तक उग आए हैं। दरारें भय पैदा कर रही हैं। खिड़कियां और दरवाजे भी खस्ताहाल हैं। मिड-डे मील के लिए बनी रसोई भी जर्जर हो चुकी है और इसकी छत का प्लास्टर तक उखड़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की जर्जर हालत के कारण बारिश के दौरान बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। हम काफी समय से स्कूल की हालत में सुधार की मांग कर रहे हैं लेकिन विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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स्कूल की जर्जर इमारत और इसके पास सड़क व तालाब के होने हर समय डर सताता रहता है। स्कूल की चहारदीवारी नहीं बनाई जा रही। स्कूल के आंगन में रिसेस के दौरान खेलते-खेलते बच्चे कई बाहर आंगन के ठीक बाहर मौजूद सड़क और तालाब तक पहुंच जाते हैं। इसका प्रवेश द्वार सड़क की तरफ है। इस पर गेट तक नहीं लगा है। ऐसे में जरा सी लापरवाही हादसे का कारण बन सकती है। स्कूल के कमरों की खस्ता हालत में सुधार पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। कमरे जर्जर हो चुके हैं। खिड़की-दरवाजों से लेकर दीवारों में दरारें और छत से प्लास्टर तक उखड़ चुका है। बच्चों के खेलने के लिए स्कूल में मैदान नहीं है। स्कूल के पास एक कनाल से अधिक जमीन उपलब्ध है और चहारदीवारी बनने के बाद आंगन ही खेल मैदान के तौर पर विकसित हो सकता है।
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पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व सरपंच
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स्कूल में पक्की चहारदीवारी बनाने और कमरों की हालत में सुधार को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्कूलों में अन्य सभी शिक्षा सुविधाओं को बढ़ाने को लेकर भी शिक्षा विभाग काम कर रहा है।
-कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ
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