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पाबंदियां हटते ही ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल बनी राह में रोड़ा

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उधमपुर। 84 घंटे की पाबंदियों हटते ही शहर में आवागमन करने वाले लोगों की राह में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल रोड़ा बनी है। इस कारण खरीदारी के लिए शहर पहुंचने और वापस जाने में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। लोगों ने उपराज्यपाल से ट्रांसपोर्टरों से बात कर समस्या सुलझाने की अपील की है।
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बसों और मेटाडोर में 50 प्रतिशत सवारियां बिठाने के आदेश के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने लगातार 13वें दिन भी वाहन नहीं चलाए। सोमवार को 84 घंटे का कोरोना कर्फ्यू खत्म होेने के कारण शहर सहित ग्रामीण इलाकों के लोगों ने खरीदारी के लिए देविकानगरी का रुख किया। लेकिन बसें और मेटाडोर नहीं चलने से दिनभर परेशान होते दिखाई दिए। हालांकि कुछ संपर्क मार्गों सहित जम्मू की तरफ आवाजाही करने वाली इक्का-दुक्का बसें व मेटाडोर चलती नजर आईं। लेकिन अधिकतर सड़कों से नदारद रहीं। लोगों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू की पाबंदियां तो हटा दी गई हैं, लेकिन आवाजाही के लिए वाहन नहीं मिलने से काफी परेशानी उठानी पड़ी है। समय पर कार्य स्थलों व मंजिल तक नहीं पहुंच पाए। कई लोगों को पैदल ही गंतव्य की ओर सफर करना पड़ा है।
वहीं, ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रधान दर्शन कोतवाल ने कहा कि युनियन की तरफ से किसी भी प्रकार की कोई भी हड़ताल नहीं की गई है। अगर कोई वाहन चालक अपनी गाड़ी चलाना चाहता है तो यह उसकी मर्जी है। जबकि अधिकतर ट्रांसपोर्टरों ने खुद ही गाड़ियां खड़ी की हैं। क्योंकि 50 प्रतिशत सवारियों को लेकर गाड़ी चलाना संभव नहीं है। इससे पेट्रोल व डीजल का खर्चा भी पूरा नहीं होगा। लेकिन सरकार जिद पर अड़ी है। न किराया बढ़ा रही है और न ही आदेश में संशोधन कर रही है। यूनियन ने अपील की थी कि 75 प्रतिशत सवारियां बिठाने की इजाजत दी जाए, ताकि किसी को भी नुकसान न हो। इसका खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ रहा है।
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