रामनगर। बसंतगढ़ में शिवगली की वादियां प्रकृति की उस अनमोल देन का प्रतीक है, जहां सुकून, सौंदर्य और शांति एक साथ मिलती है। बर्फ की सफेद चादर में लिपटे पहाड़, देवदार और चीड़ के घने जंगल व निर्मल वातावरण मिलकर शिवगली को ऐसा प्राकृतिक स्थल बनाते हैं, जिसे निहार कर पर्यटक आकर्षित हो जाता है, फिर भी अद्भुत क्षेत्र वर्षों से सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
शिवगली को पर्यटन मानचित्र पर उसकी न ही पहचान मिल पाई है और न ही बुनियादी सुविधाओं का विकास हो सका है। सड़क, ठहरने की व्यवस्था और प्रचार-प्रसार के अभाव में क्षेत्र अपनी संभावनाओं के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाया। स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब सरकार पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बताती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे स्थलों को अनदेखा कर दिया जाता है। यदि सरकार और प्रशासन दूरदर्शिता दिखाए तो शिवगली को बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सुनियोजित ढंग से इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए विकास संभव है। संवाद