पेड़ के नीचे हुआ था आगाज, राजा-महाराजाओं के समय से जारी मंचन का सिलसिला
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। चिनैनी की रामलीला प्राचीन समय से जारी है। इसका आगाज उस समय हुआ था जब जनता तक आवाज पहुंचाने का कोई साधन नहीं था और दीये की रोशनी में रामलीला होती थी। बताया गया है कि एक पेड़ के नीचे रामलीला का मंचन शुरू हुआ था।
चिनैनी की रामलीला की शुरुआत राम चौक पर एक पेड़ के नीचे हुई थी। कपड़े का एक परदा लगाकर कलाकार तैयार होते थे और परदा उठाकर लोगों के सामने आकर रामलीला का मंचन करते थे। उस समय न ही बिजली थी और न ही लोगों तक आवाज पहुंचाने का कोई साधन था। बड़ी संख्या में चिनैनी व विभिन्न क्षेत्रों के लोग रामलीला देखने आते थे।
रामलीला कमेटी के प्रधान शशि शेखर थापा की मानें तो 1947 से पहले से ही चिनैनी में रामलीला का मंचन हो रहा है। खुले आसमान के तले रामलीला शुरू हुई थी। अब अपना मंच है, जिस पर रामलीला हर वर्ष नवरात्र में होती है।
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चिनैनी में 15 दिनों तक होता है रामलीला का मंचन
चिनैनी की रामलीला राजा-महाराजाओं के जमाने से हो रही है। यह बाकी जगहों से अलग 15 दिनों तक होती है। रामलीला के मंच पर हर दृश्य को दर्शाया जाता है। रामलीला का मंचन दो जगहों पर होता है। एक वर्ष राम चौक ती दूसरे वर्ष बस स्टैंड पर। दोनों ही कमेटियों के सहयोग से चिनैनी की रामलीला 15 दिनों तक आयोजित होती है।
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आतंकवाद के दौर में भी नहीं थमा मंचन
गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते दो वर्षों तक चिनैनी में रामलीला पर पहली बार ब्रेक लगा था। इसके अलावा जब प्रदेश में आतंकवाद चरम पर था, तब भी चिनैनी में रामलीला का मंचन किया जाता था।
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रामलीला के लिए रिहर्सल जारी
चिनैनी रामलीला क्लब में रिहर्सल की जा रही है। नए कलाकार पुराने कलाकारों से सलाह ले रहे हैं और रिहर्सल कर रहे हैं। उधर रामलीला क्लब में रंग रोगन तथा साफ सफाई का कार्य भी किया जा रहा है।