कारगिल युद्ध के दौरान सेना के सहयोग के लिए काम कर चुके पोर्टरों ने नगर में रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया। पोर्टरों ने घोषणा की है कि दस दिसंबर को नई दिल्ली में वह विशाल धरना देंगे।
आल पोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश कुमार ने रैली को संबोधित करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि आज तक किसी भी भर्ती रैली में प्राथमिकता नहीं देने तथा उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करने की जा रही।
मांगों को लेकर लगातार संघर्ष किया जा रहा है तथा धरना प्रदर्शनों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
सुबह सबसे पहले पोर्टर शहीद भगत सिंह पार्क में एकत्रित हुए तथा वहां से वह रैली की शक्ल में गोल मार्केट का चक्कर लगाया। इस दौरान उन्होंने सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार जब देश पर पाकिस्तान द्वारा कारगिल युद्ध थोपा गया था तब पोटरों ने भी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था। लड़ाई समाप्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें उनके द्वारा किए गए कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा।
वहीं इसके लिए उन्हें आश्वासन भी मिले लेकिन यह आश्वासन के आश्वासनों तक ही सीमित रहे। रमेश कुमार ने बताया कि उनका लक्ष्य है केंद्र सरकार को जगाया जाए ताकि बेरोजगार पोर्टरों को रोजगार हासिल हो सके।
उन्होंने जिन पोर्टरों ने रोजगार पाने की अधिकतम आयु सीमा पार कर ली है। वह अब कहां जाएंगे तथा अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेंगे। इस अवसर पर कुलदीप कुमार, पुरुषाोत्तम शर्मा, रवि कुमार, गुरदयाल सिंह, विशन दास, मोहन लाल, संजय कुमार, जयपाल, रतन, दिलीप कुमार, एसएस चिब, रूमाल सिंह आदि मौजूद थे।