गरीब की जान सस्ती होती है भाई...। यह शब्द बोलने के बाद तीन मासूम बेटों को खोने वाला पिता भोलानाथ फूट-फूटकर रोने लगा। दरअसल, बिरमा नाले में हुए मोर्टार शेल धमाके में मारे गए नाबालिग तीन भाइयों की मौत के बाद प्रशासन की ओर से मात्र साठ हजार रुपये का मुआवजा दिया गया।
पहले से टूट चुके बदनसीब पिता भोलानाथ ने इस पर नाराजगी जताई। भोलानाथ की आंखों में आंसुओं का सैलाब और चेहरे पर बेबसी तीन बच्चों को खोने का गम साफ बयान कर रही थी। उसने बताया कि वह एक ठेकेदार के पास दिहाड़ी लगाकर अपने परिवार का गुजारा करता है।
धमाके में मरा उसका बड़ा बेटा महेश मात्र 15 साल का था। कुछ ही दिनों बाद वह भी परिवार का सहारा बनने वाला था। अगर महेश जिंदा होता तो उसका बोझ बहुत जल्दी कम हो जाता। भोलानाथ और उसके परिवार की हालत देखकर सभी का कलेजा फट रहा था।