किश्तवाड़। मकर संक्रांति पर बंद हुए मां मचैल के दरबार के कपाट बैसाखी के दिन फिर खुलने वाले हैं। इस कारण मां चंडी के भक्तों में दर्शन के लिए काफी उत्साह है।
गौरतलब है कि हर साल मकर संक्रांति के दिन मंदिर को दर्शन के लिए बंद कर दिया जाता है। वहां से माता की मूर्ति को गांव में पहलवान सिंह के घर में बने मंदिर में रखा जाता है, जहां हर रोज उसकी पूजा-अर्चना होती है। बैसाखी के दिन फिर मूर्ति को मुख्य मंदिर में प्रतिष्ठापित किया जाता है। इस दिन को इलाके में त्योहार के रूप में मनाया जाता है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद भक्तों का दर्शन के लिए आना शुरू हो जाता है। तीन माह के दौरान गांव के मंदिर में ही पूजा होती है। हर साल जुलाई में मां मचैल की पवित्र यात्रा शुरू होती है। 18 अगस्त को माता की छड़ी आती है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।