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बिना मान्यता के अंधेरे में रखा दसवीं के छात्रों को

Thu, 19 Mar 2015 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उध्ामपुर
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गढ़ी क्षेत्र का एक निजी स्कूल ने दसवीं के दर्जन भर विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने दो साल तक विद्यार्थियों को अंधेरे में रखा। बिना मान्यता के ही स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया। जब दसवीं बोर्ड परीक्षा की बारी आई तो प्रवेश कैसे दिए जाएं यह नौबत आ गई। इस हाल में विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है।
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विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में देख गुस्साए अभिभावकों ने बुधवार को डीसी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी बलवीर सिंह ने कहा कि रौन दोमेल के इस स्कूल को दसवीं तक मान्यता नहीं है। स्कूल के पास आठवीं तक ही मान्यता है।

अभिभावकों को चाहिए था कि वह पूरी जांच पड़ताल करके बच्चों का स्कूल में प्रवेश कराते। फिलहाल, इस मामले की उन्हें जानकारी मिली है। स्कूल में दस से बारह बच्चे ही दसवीं कक्षा में हैं।  पूरा रिकार्ड जांच करने के बाद ही स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रबंधन से देर रात कोई बात नहीं हो सकी है।
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प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थियों और अभिभावकों ने बताया किया कि स्कूल को दसवीं कक्षा की मान्यता नहीं होने बावजूद प्रवेश दिया गया और जब परीक्षा देने की बारी आई, तो रोल नंबर स्लिप ही नहीं मिली। उन्होंने कहा कि स्कूल अवैध तरीके से नौवीं और दसवीं में प्रवेश देकर कक्षाएं चला रहा था।

बोर्ड परीक्षा शुरू हो गई है, लेकिन इस स्कूल के  विद्यार्थियों की परीक्षाएं नहीं ली जा रही हैं, वह परीक्षा से वंचित हैं। उन्होंने डीसी से मांग की कि जो विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पाए हैं, इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। स्कूल के करीब एक दर्जन छात्रों का एक साल बर्बाद हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसलिए डीसी उधमपुर से गुहार लगाई है कि विद्यार्थियों का एक साल बर्बाद होने से बचाया जाए। साथ ही स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शनकारियों में शामिल छात्राएं श्री देवी, अनुराधा, आरती देवी, सविता, दीपक कुमार, संजय कुमार, जीवन कुमार ने बताया पिछले दो सालों से वह स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दो सालों से उन्हें धोखे में रखा गया। स्कूल के पास दसवीं की कोई मान्यता ही नहीं थी। स्कूल प्रबंधन ने परीक्षा फार्म भी भरवाए थे। अब दसवीं की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। उन्हें अभी तक प्रवेश पत्र नहीं मिला है।

स्कूल प्रबंधन लगातार टालमटोल कर रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर जब बात रखी गई तो पता चला कि स्कूल के पास कोई मान्यता ही नहीं है। 
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