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मौसम एक बार फिर हुआ मेहरबान

Mon, 08 Feb 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चिनैनी
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मौसम एक बार फिर मेहरबान हुआ। कई दिन से लगातार साफ चल रहे मौसम के मिजाज में अचानक बदलाव आया। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पत्नीटाप, नत्थाटाप के अलावा मिनी कश्मीर के नाम से विख्यात भद्रवाह और किश्तवाड़ में भी बर्फ के फाहे गिरे।
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इससे मौसम में आई गर्मी एक बार फिर काफूर हो गई। शीतलहर का दौर चल पड़ा। इस बीच रविवार को सैलानियों का हुजूम भी पत्नीटाप और नत्थाटाप में उमड़ा पड़ा। बारिश और बर्फबारी से लोगों को काफी राहत मिली।

शनिवार की देर रात को चिनैनी क्षेत्र में तेज बारिश और ऊंची पर्वतीय चोटियों पर बर्फबारी शुरू हो गई। जो सैलानी पत्नीटाप में पहले से रुके हुए थे, उन्हें रविवार की सुबह कुदरत ने बर्फ  की सफेद चादर का तोहफा दे दिया।
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पत्नीटाप के मैदान में करीब चार इंच तक ताजा बर्फ  बिछ चुकी थी। जबकि नत्थाटाप में दस इंच तक ताजा हिमपात हुआ। रविवार की सुबह का नजारा देखने लायक था। हर तरफ बर्फ चांदी की तरह चमक रही थी।

सर्दी के इस सीजन में यह बारिश और बर्फबारी अच्छी कही जा सकती है। जुगधार, शिवगढ़ धार, देरा टाप, स्योजधार पर भी भारी बर्फ बारी हुई है।


आनंदमय हुआ छुट्टी का दिन
प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पटनीटाप व नत्थाटाप में पहुंचने वाले सैलानी काफी उत्साहित दिखे। रविवार की छुट्टी उनके लिए वरदान से कम नहीं था।

सैलानी ठंड की परवाह किए बिना मौज-मस्ती करने लगे। रविवार दिन को भी बर्फ के फाहे गिरे, जिससे सैलानियों की खुशी दोगुनी हो गई।

पहली बार हिमपात का दृश्य उनके लिए ऐतिहासिक हो गया। लोग स्लैज के अलावा घुड़सवारी, बर्फ  के गोले, हिममानव बनाकर मस्ती करते दिखे।

बसंतगढ़ में सीजन की पहली बर्फबारी
रामनगर (ब्यूरो)। रामनगर के बसंतगढ़ तहसील में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। आश्चर्य की बात यह है कि यहां हमेशा दिसंबर महीने में बर्फ गिरती थी, लेकिन इसबार दिसंबर और जनवरी सूखा चला गया।

लोग मान रहे थे कि इस बार यहां बर्फ नहीं पड़ेगी। लेकिन फरवरी के पहले सप्ताह में बसंतगढ़ में हिमपात स्थानीय लोगों को चौंका दिया। अब उम्मीद की जा रही है कि शायद यहां पहले जैसे बर्फबारी होगी।
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पहाड़ों पर हिमपात, मैदानों में बारिश
किश्तवाड़ (ब्यूरो)। किश्तवाड़ जिले में रविवार की सुबह शहर में जमकर बारिश हुई जबकि पर्वतों पर बर्फबारी हुई। हालांकि दोपहर तक मौसम साफ हो गया था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो सर्दी का मौसम आया ही नहीं और न ही कोई बारिश हुई। हालांकि तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर महसूस की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार शायद ही शहर में बर्फबारी नसीब नहीं है। ऐसे में इस वर्ष न तो कोई फसल ही होगी और न ही फल। पेयजल का भी गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
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