उधमपुर। स्थायी करने और पुरानी पेंशन की मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों की कामछोड़ हड़ताल वीरवार को 13वें दिन भी जारी रही लेकिन इस बार कर्मचारी मांगें पूरी न होने पर भूख हड़ताल पर उतर आए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बीती रात नगर परिषद के प्रभारी सीईओ की ओर से शहर के कुछ स्थानों से गंदगी हटाने के प्रयासों का भी जमकर विरोध किया। उधमपुर में सीईओ कार्यालय के बाहर चल रहे सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन के समर्थन में यूनियन के कई पदाधिकारी और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रभारी सीईओ को हटाने की मांग करते हुए हड़ताल को आगे भी जारी रखने की चेतावनी दी। सफाई कर्मचारियों के समर्थन में आए अर्बन लोकल बॉडी के प्रधान रवि रंधावा ने बताया कि अफसोस की बात है कि लोकतांत्रिक ढंग से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारी अधिकारियों से मिलकर मसले को सुलझाने के प्रयास कर रहे हैं लेकिन कुछ अधिकारी मसले को सुलझाने की बजाय भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि चाहे कोई भी अधिकारी हो, जब तक सफाई कर्मचारियों के साथ मुख्यमंत्री खुद मुलाकात नहीं करते, तब तक यह हड़ताल खत्म नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक प्रभारी सीईओ को हटाया नहीं जाता और सफाई कर्मचारियों के मसलों का लिखित रूप में हल नहीं होता, तब तक वे आज से नगर परिषद कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल सिर्फ नगर परिषद के अस्थायी कर्मचारियों की नहीं है, बल्कि पीडीडी, पीएचई, पीडब्लयूडी आदि हर उस विभाग के कर्मचारी के हित से जुड़ी है, जो पिछले लंबे समय से विभागों में अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूनियन ने फैसला लिया था कि बीच में एक दिन निकालकर पूरे शहर में सफाई भी की जाएगी लेकिन उधमपुर में रात को हुए घटनाक्रम के बाद सफाई कर्मचारियों में काफी रोष है। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में विभिन्न यूनियन के प्रधान, सफाई कर्मचारी यूनियन सांबा, कठुआ, रियासी, चिनैनी, रामनगर, किश्तवाड़ आदि के प्रधानों सहित डीडीसी अध्यक्ष परीक्षित सिंह, युवा नेता गगन शर्मा, महेश बनाथिया जैसे अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे थे।
नगर परिषद के सीईओ विशाल सडोत्रा कुछ दिनों के अवकाश पर हैं। उनके स्थान पर बुधवार शाम को जिला सूचना अधिकारी राजिंद्र डिंगरा को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। उन्होंने बीती रात डोर टू डोर कचरा उठाने वाली प्राइवेट कंपनी के सफाई कर्मचारियों की मदद से कुछ स्थानों से कचरा हटाने का प्रयास किया। इसकी भनक लगते ही सफाई कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और काम बंद करवाते हुए उक्त अधिकारी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।
क्या हैं मांगें
- अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करना।
- एनपीएस की बजाय पुरानी पेेंशन योजना का लाभ देना।
- सफाई कर्मचारियों की कमी को दूर करना।
इस बारे में प्रभारी सीईओ राजिंद्र डिंगरा ने बताया कि कुछ स्थानों पर कचरा बीच सड़क पर पहुंच गया था, जिसके चलते उन्होंने मात्र सड़क से ही कचरा हटाने का प्रयास किया था ताकि आम जनता को परेशानी न हो। सफाई कर्मचारियों का मसला जिला प्रशासन के संज्ञान में है और कर्मचारियों की सूची भी जिला विकास आयुक्त को सौंप दी गई है। उच्चाधिकारियों से बात के बाद क्या हल निकलकर सामने आता है, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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