उधमपुर। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। यदि ईंधन के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो आने वाले दिनों में राशन, दाल, चावल, आटा, खाद्य तेल, सब्जियां, फल, कपड़े और खाने-पीने की अन्य वस्तुएं और भी महंगी हो सकती हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, साथ ही घरेलू बजट प्रभावित होगा।
बाजारों में आने वाला अधिकांश सामान बाहरी राज्यों और शहरों से ट्रकों व बड़ी गाड़ियों के माध्यम से पहुंचता है। चावल पंजाब और आरएस पुरा से आता है जबकि आटा आरएस पुरा और कठुआ से मंगवाया जाता है। दालें, तेल और अन्य राशन सामग्री विभिन्न वेयर हाउस से लाई जाती हैं। इसके अलावा सब्जियां और फल भी बाहरी मंडियों से पहुंचते हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल महंगा होने से परिवहन खर्च लगातार बढ़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि पहले ही किराए में करीब 18 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है और अब ईंधन के दाम बढ़ने से माल देने वाली कंपनियों ने किराया बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसका असर बाजार में बिकने वाले सामान पर पड़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि पहले ही रसोई का बजट बिगड़ चुका है और अब ईंधन महंगा होने से महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।
हमारी भी मजबूरी बन चुकी है क्योंकि सामान बाहर से आता है और बढ़ा हुआ किराया भी देना पड़ता है। ऐसे में हम चाहकर भी पुराने दाम पर सामान बेचने में सक्षम नहीं हैं।
- कुलदीप गुप्ता, व्यापारी।
हर प्रकार का सामान गाड़ियों के जरिये बाजार तक पहुंचता है। जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो उसका असर व्यापार पर पड़ता है। व्यापारी भी बढ़ती लागत से परेशान हैं और आखिर में बोझ आम जनता पर पड़ता है।
- जितेंद्र कुमार, व्यापारी।
पहले जितने पैसे में महीने का खर्च आराम से चल जाता था अब आधे महीने में खर्च हो जाते हैं। राशन, गैस और बढ़ते परिवहन किराया ने घर चलाना मुश्किल कर दिया है।
-संतोश देवी, स्थानीय
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे बाजार पर पड़ रहा है। बाहर से आने वाले सामान का किराया बढ़ गया है जिससे राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं महंगी होने की आशंका है।
- जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल।