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Udhampur News: सभी के दुख हरती हैं मां कालका, मंदिर के प्रति लोगों में आस्था

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रियासी। नगर के बीचोंबीच वार्ड-3 पहाड़ी पर स्थित मां कालका माता के मंदिर के प्रति लोगों में बड़ी आस्था है। मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से माता के मंदिर में आ कर वहां पर बनी प्राकृतिक और पवित्र पिंडी के समक्ष अपनी परेशानी व दुख रखता है। पिंडी की पूजा करता है उस पर मां की अपार कृपा होती है। मां कालका के मंदिर में नगर के ही नहीं बल्कि आस-पास के गांव के लोग भी माथा टेकने को आते हैं।
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नवरात्र में लोग रोजाना ही सुबह व शाम मंदिर में लोग माथा टेकने व पूजा करने आते है। मंदिर का इतिहास लगभग तीन सौ वर्ष पुराना है। जब उत्तर प्रदेश से आए एक बाबा ने जहां के लोगों को अपने सपने बारे बताते हुए पहाड़ी पर माता की पिंडी होने की बात बताई। पहाड़ी चारों तरफ से जंगल से भरी हुई थी। ढोल बजाते हुए और जंगली जानवरों को दूर भगाते हुए स्थानीय लोग वहां पहुंचे तो एक पिंडी के आगे दो शेर बैठे हुए दिखे। लोगों के माथा टेकने के बाद शेर वहां से चले गए। मंदिर की पहाड़ी के पास वाली जगह को आज भी शेरों वाला बाग कहा जाता है। मां कालका की पूजा आज भी बाबा के वंशज कर रहे हैं। मां कालका बडू बिरादरी की कुलदेवी के रूप में भी जानी जाती हैं। बिरादरी के लोग समय समय पर जहां पर आकर प्रसाद चढ़ाते हैं और पूजा करते हैं। माता मंदिर रियासी से कटरा, पौनी, सलाल, अरनास की तरफ जाने वाले चारों तरफ के सड़क मार्ग से दिखता है। वीरवार से शुरू होने वाले नवरात्र के लिए मंदिर में लोगों की भीड़ आने की पूरी संभावना है। मंदिर में रंग-रोगन कर रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गई हैं।
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