रियासी। धार्मिक स्थल सियाड़ बाबा विकास की राह ताक रहा है। चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा मनमोहक स्थान सरकारी मदद के इंतजार में हैं। मां वैष्णो देवी और शिवखोड़ी में दर्शन के बाद यहां आने वाले यात्री मूलभूत सुविधाएं की कमी के कारण मायूस हो रहे हैं। लगभग छह सौ फीट की ऊंचाई से बह रहा झरना सभी चिंताएं दूर देता है। 15 जुलाई 2018 को पहाड़ी का बड़ा हिस्सा पानी के बहाव के साथ आने से सात लोगों की दबकर मौत हो गई थी और तीस से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
प्राकृतिक आपदा के बाद प्रशासन की तरफ से झरने के नीचे नहाने पर रोक लगा दी थी। वहीं नाले में आई बाढ़ से शैचालय और कमरे के साथ बने पार्क को नुकसान पहुंचा था, जिसके हालात आज भी दयनीय है। झांसी से आए विवेक कुमार मलंग और मनीष रायकवार के अलावा मध्यप्रदेश की दीपिका ने बताया कि इस स्थान की सुंदरता देखने लायक है। ऊंची पहाड़ी से बहता झरना और पास में स्थित दरिया चिनाब, पहाड़ियों के बीच ठंडी हवाएं चलती रहती हैं। मगर शौचालय और आराम करने की व्यवस्था नहीं है।
पर्यटन विभाग की तरफ से एक इमारत बनाई गई है लेकिन वह भी खस्ता है। सरकार और प्रशासन को धार्मिक स्थल की महत्वता को देखते हुए विकास कार्य करवाने चाहिए ताकि लोगों को सुविधाएं मिल सकें।
आठ वर्ष से अनदेखी का बना शिकार
स्थानीय सुरिंदर शर्मा और राहुल कुमार ने कहा कि आठ वर्ष से किसी भी नेता या प्रतिनिधि ने भी इस स्थान की तरफ ध्यान नहीं दिया है। यहां आने वाले सैलानी प्राकृतिक सुंदरता को देखकर आनंदित हो उठते हैं लेकिन असुविधाओं के कारण लौट जाते हैं। सरकार को पर्यटन मानचित्र में लाकर बाबा सियाड़ स्थल का जीर्णोद्धार करवाना चाहिए। प्रशासन को भी विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।