देविका नदी पर अतिक्रमण का दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत उधमपुर की देविका नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 170.5 करोड़ का प्रोजेक्ट तो मंजूर कर लिया गया है, लेकिन सरकार और प्रशासन के लिए इस प्रोजेक्ट पर काम करना बड़ी चुनौती रहेगा। क्योंकि वर्तमान समय में पूरी देविका नदी अतिक्रमण के जाल में जकड़ चुकी है। सीवरेज की व्यवस्था न होने के कारण हर रोज शहर की गंदगी व पानी देविका नदी में डाली जा रही है।
देविका नदी को गंगा की बड़ी बहन के नाम से जाना जाता है। इसका महत्व अब जाकर केंद्र सरकार को समझ आया है। इसलिए बड़े प्रोजेक्ट को मंजूर किया गया है। शहर के एमएच चौक से लेकर मोआड़ा मोड़ तक करीब चार किलोमीटर का देविका का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है।
अतिक्रमण के कारण देविका नदी पूरी तरह से सिकुड़ चुकी है और वर्तमान समय में नाले का रूप ले लिया है। प्रशासन ने अतिक्रमण को हटाने के दावे तो बहुत किए, लेकिन आज तक प्रशासन को एक भी मकान या दुकान को हटा नहीं पाया है।
पहले सीवरेज की व्यवस्था करना जरूरी
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत देविका नदी को प्रदूषण मुक्त करने की बात की जा रही है, लेकिन बिना सीवरेज प्रोजेक्ट का यह संभव ही नहीं है। सीवरेज की व्यवस्था नहीं होने के कारण नगर परिषद ने ज्यादातर नालों का रुख देविका नदी की तरफ मोड़ा हुआ है। इसके कारण सारी गंदगी और गंदा पानी देविका में जाता है।
एमएच चौक पर एक सुलभ शौचालय ने गंदगी की निकासी का रुख देविका नदी में किया है। कमांड अस्पताल का गंदा पानी देविका में डाला जा रहा है। लोगों ने घरों ने अपने बाथरूम और शौचालय की गंदगी का रुख देविका नदी की तरफ रखा है। इसलिए सीवरेज की व्यवस्था के बिना देविका नदी का प्रदूषण मुक्त होना संभव नहीं है।