- कोर्ट ने कानूनी बारीकियों से ऊपर मानवीय संवेदनाओं को दी प्राथमिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। यह अनोखा और भावुक मामला उधमपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत से सामने आया है। आमतौर पर कानूनी मामलों में सबूतों या जब्त सामानों को केस पूरी तरह खत्म होने के काफी समय बाद ही रिलीज किया जाता है। इस मामले में जज ने कानूनी पेचीदगियों से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं और धार्मिक रीति-रिवाजों को प्राथमिकता दी।
अदालत ने मृतक के कपड़ों को केवल इसलिए तुरंत रिलीज करने का आदेश दे दिया ताकि परंपरा के अनुसार उन्हें समय पर कब्र में दफनाने की रस्म पूरी की जा सके। श्रीनगर के बेमिना चौक के रहने वाले वालीद मुनीर पर पुलिस स्टेशन रेहंबल में एक आपराधिक मामला दर्ज था। लेकिन, जिस घटना में अपराध हुआ था, उसी दौरान वालीद की मृत्यु हो गई थी। चूंकि आरोपी की मौत हो चुकी थी, इसलिए अदालत ने इसी साल 30 जनवरी 2026 को ही इस केस की कार्यवाही को समाप्त कर दिया था और केस की फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेज दिया था।
भाई ने कोर्ट से लगाई थी गुहार
मृतक के सगे भाई ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में एक अर्जी लगाई। उन्होंने मांग की कि उनके भाई के जो कपड़े (पैंट और शर्ट) पुलिस के मालखाने में जमा हैं, उन्हें वापस लौटा दिया जाए। उन्होंने अदालत को बताया कि वे विशेष समुदाय से हैं। उनके धार्मिक रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार मृतक के कपड़ों को कब्र में दफनाना जरूरी है। उन्होंने यह भी दलील दी कि अब इन कपड़ों की पुलिस जांच या कोर्ट के लिए कोई जरूरत नहीं रह गई है।
अदालत का फैसला
मामले की गंभीरता और धार्मिक भावनाओं को समझते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस अर्जी को स्वीकार कर लिया। उन्होंने मालखाने के प्रभारी को आदेश दिया कि कपड़ों की उचित फोटोग्राफी कर ली जाए (ताकि भविष्य के रिकॉर्ड में सबूत रहे) और उसके बाद तुरंत ये कपड़े मृतक के भाई को सौंप दिए जाएं।