चिनैनी के बाबा बूढ़ा केदारनाथ में बाहर और गुफा के अंदर भगवान शिव के घुटनानुमा आकार का दृश्य।
- हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन लगता है एक दिवसीय मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। चिनैनी तहसील मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बाबा बूढ़ा केदारनाथ में श्रद्धालु भगवान शिव के घुटनानुमा आकार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गुफा के अंदर मौजूद एक बड़ी शिला के साथ भगवान शिव के घुटने की आकृति बनी हुई है। इसके दर्शन के लिए गुरु पूर्णिमा के दिन लगने वाले मेले में श्रद्धालुओं का तांता लगेगा।
बाबा बूढ़ा केदारनाथ कमेटी के प्रधान श्याम सिंह ने बताया कि हजारों वर्ष पुराने बाबा बूढ़ा केदारनाथ मंदिर में कई रहस्य छुपे हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह मंदिर उस समय का है जब भगवान शिव ने अपने एक भक्त भस्मासुर को वरदान दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा। भस्मासुर ने भगवान शिव पर ही इसे आजमाने का प्रयास किया लेकिन भगवान शिव चिनैनी के बाबा बूढ़ा केदारनाथ में मौजूद बड़ी शिला के अंदर चले गए थे। वहां बैठ कर वह तपस्या करने लगे। भस्मासुर भी वहां पहुंच गया। इसके बाद विष्णु भगवान ने औरत का रूप लेकर भस्मासुर को ऐसा ही करने को कहा जैसा वह करेंगे। नाचते नाचते भगवान विष्णु ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा और भस्मासुर ने भी ऐसा किया इसके बाद वह भस्म हो गया। आज भी बाबा बूढ़ा केदारनाथ का मंदिर एक बहुत बड़ी शीला के बीच है जहां पर भगवान शिव के घुटनानुमा आकार को साफ-साफ देखा जा सकता है ।
गुफा के अंदर दिन में भी जली रहती हैं लाइटें
प्रधान की मानें तो मंदिर के अंदर सूर्य की रोशनी जाने का कोई भी साधन नहीं है, लेकिन एक दिन ऐसा होता है जब गुफा के अंदर भगवान शिव के घुटने पर सूर्य की किरण पड़ती है। वह दिन मकर संक्रांति का होता है। उन्होंने कहा कि दिन के समय भी वहां पर बिजली की लाइट जला कर रखनी पड़ती है, और श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर पाते हैं । गुफा के अंदर रात के समय कोई भी नहीं ठहर सकता, जबकि इस जगह पर अपने आप पूजा भी होती है, पूजा के दौरान शंख तथा घंटियां भी बजती हैं, हालांकि पूजा कब होगी और किस दिन होगी,यह तय नहीं है मगर साल में एक या दो बार पूजा जरूर होती है ।