सात साल पहले हुई एक रहस्यमय हत्या के मामले का रामबन पुलिस ने अब खुलासा किया। अभी तक मृतक के गुमशुदगी का मामला दर्ज था।
इस मामले ने फिर से तूल तब पकड़ा, जब मृतक के एक करीबी रिश्तेदार ने सीजेएम कोर्ट में इस मामले की जांच करवाने की अपील की। गत दिवस डोमनी गली से एक कंकाल और कपड़े मिलने से हत्या की पुष्टि हो गई।
जानकारी के मुताबिक हाला धंद्राट निवासी गुलाम कादिर लोहार 30 जुलाई 2007 को अचानक लापता हो गया था। कई दिनों तक उसका पता नहीं चलने पर उसके रिश्तेदारों ने पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होता देख कर सात साल बाद गुलाम कादिर के एक करीबी रिश्तेदार ने 12 दिसंबर 2014 को सीजेएम कोर्ट रामबन में गुलाम कादिर के रहस्यमय तरीके से लापता होने के मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की अपील की।
इस पर सीजेएम कोर्ट ने पुलिस को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इस पर पुलिस ने आनन-फानन में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। दल का मुखिया डीएसपी हेडक्वार्टर नरिंद्र परिहार को बनाया गया जबकि इसमें सब इंस्पेक्टर पद्मदेव सिंह के अलावा अन्य पुलिस अधिकारी शामिल रहे।
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने पूछताछ के लिए कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। इनमें से एक व्यक्ति ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पुलिस का कहना है कि पहले से ही तयशुदा साजिश के तहत हाला के ही रहने वाले मो. शरीफ ने गुलाम कादिर को भेड़-बकरियां खरीदने के बहाने करीब तीस किलोमीटर दूर डोमनी गली इलाके ले गया।
वहां पर उसके एक और साथी गुलाम नबी निवासी कुमेत की मदद से गुलाम कादिर से पैसे छीन लिए गए और उसे एक ऊंची पहाड़ी से धक्का देकर गहरी खाई में गिरा दिया गया।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर जायजा लिया, जिस दौरान वहां से कंकाल और गुलाम कादिर के कपड़े मिले। पकड़ों को उसके रिश्तेदारों ने पहचाना।
उसके बाद पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। अभी यह पता नहीं चला है कि उसकी हत्या क्यों की गई। आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि मृतक की काफी संपत्ति है। वह अविवाहित था। उसका अपना कोई वारिस भी नहीं है।