उधमपुर। रामनगर उपजिला अस्पताल में मौजूदा समय में एक ही शव रखने की जगह होने के साथ ही शवों को सुरक्षित रखने के लिए एक शीशे का फ्रिजर रखा गया है।
इसके अलावा अस्पताल में डॉक्टर व स्टाफ की कमी के चलते लोग अपना इलाज करवाने के लिए जीएमसी उधमपुर आते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि 70 साल बीत जाने के बाद भी आधुनिक तरीके से शवगृह नहीं बन पाया है। तहसील रामनगर डेढ़ लाख के करीब आबादी वाला क्षेत्र है।
शवगृह में घंटों शवों को रखने की नहीं है सुविधा
अस्पताल परिसर में बने शवगृह में एक ही शव रखने की जगह है और एक की फ्रिजर लगाया गया है। कभी कोई ऐसा बड़ा हादसा हो जाए और पांच से छह शव इकट्ठे अस्पताल में आते हैं तो उन्हें रखने की जगह नहीं है। इतनी आबादी वाले क्षेत्र में सिर्फ एक ही शव रखने वाले शवगृह को बनाया गया है। इतना ही नहीं, क्षेत्र से मिलने वाले लावारिस शवों को कानूनी प्रावधान के मुताबिक 72 घंटे तक पहचान के लिए रखना पड़ता है। ऐसे में जहां शवगृह में एक ही शव रखने की जगह है तो अगर ओर कोई और शव आ जाए तो अस्पताल प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। इसके चलते शवों को जीएमसी उधमपुर भेजने के अलावा कोई ओर चारा नहीं है।
कई बार आधुनिक तरीके से शवगृह बनाने की मांग कर चुके है स्थानीय लोग
हालांकि स्थानीय लोग स्वास्थ्य विभाग व सरकार से अस्पताल में आधुनिक उपकरणों से लैस शवगृह बनाने के साथ ही शवगृह में कोल्ड स्टोर की भी मांग कर चुके हैं क्योंकि सर्दी में शव इतनी जल्दी खराब नहीं होते है। गर्मी के मौसम में शवगृह में लगाया गया फ्रिजर ज्यादा देर रात शव को रखने में सक्षम नहीं है।
इस संदर्भ में बीएमओ रामनगर डॉ. गुरवींद्र सिंह का कहना था कि शवगृह में कोल्ड स्टोर तो नहीं बना है। अलबत्ता कोई शव खराब न हो, उसके लिए एक शव रखने वाला फ्रिज रखा गया है। अगर रात में किसी शव को रखना पड़ जाए तो उसे उस फ्रिज में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि उनके दो साल के कार्यकाल के दौरान किसी शव को जीएमसी उधमपुर रेफर नहीं किया गया लेकिन अगर कोई बहुत ही खराब स्थिति में शव आए तो उसे जीएमसी उधमपुर के शवगृह में भेजा जाता है।
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